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कांग्रेस के हाथों से फिसलता विदर्भ का गढ़, राकांपा ने छीनी आधी शक्ति

7 वर्ष पहले
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वर्धा. वर्ष 1985 तक कांग्रेस के गढ़ के रूप में विदर्भ का उल्लेख होता था। इसके बाद पार्टी की विदर्भ पर पकड़ कमजोर होती चली गई। वर्ष 1990 के विधानसभा चुनाव से विदर्भ में कांग्रेस की दुर्दशा शुरू हुई। वर्ष 1968 में हुए विधानसभा चुनाव में कांगे्रस ने विदर्भ में 48 सीटें जीती थी और वर्ष 1980 के चुनाव में 58 सीटें जीत कर सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन किया था।
इंदिरा गांधी युग खत्म होने के बाद वर्ष 1985 में हुए विधानसभा चुनाव में विदर्भ में कांग्रेस के 45 विधायक चुनकर आए थे जबकि भाजपा को सिर्फ 3 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। विदर्भ पर कांग्रेस की पकड़ थी। वर्ष 1985 के बाद राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस चमकी, लेकिन विदर्भ में पिछड़ती चली गई। ग्रामीण क्षेत्रों में ओबीसी युवकों का बड़ा वर्ग शिवसेना से जुडऩे लगा। भाजपा ने भी अमीरों के साथ ही गरीबों तथा पिछड़ों पर ध्यान देना शुरू किया।
ग्रामीण क्षेत्रों में शिवसेना के साथ भाजपा ने भी अपना दबाव बनाना शुरूकिया। इससे दोनों पार्टियों की स्थिति में जबरदस्त सुधार हुआ और कांग्रेस के लिए संकट की स्थिति बनी। कांग्रेस को विदर्भ में वर्ष 1990 के चुनाव में पहला झटका लगा। पार्टी को 25 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। 22 सीटों पर भाजपा-सेना की जीत हुई। वर्ष 1995 के चुनाव में सिर्फ 17 सीटों पर कांग्रेस को संतोष करना पड़ा जबकि भाजपा-सेना गठबंधन के 33 विधायक चुनकर आए।
कांग्रेसी नेताओं की आपसी लड़ाई, मतभेद, एक-दूसरे की टांग खींचने की भावना मुख्य कारण था । वर्ष 1999 के चुनाव में कांग्रेस को विदर्भ में स्थिति सुधारने का मौका मिला, लेकिन इसी दौरान कांग्रेस का विभाजन होने से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का उदय हुआ। राकांपा ने पांच सीटें जीती जबकि भाजपा-शिवसेना ने 29 सीटों पर कामयाबी हासिल की। वर्ष 2004 में दोनों का प्रदर्शन 50-50 रहा। कांग्रेस को 19 सीटों पर संतोष करना पड़ा।
शिवसेना से नारायण राणे की बगावत के बाद विजय वडेट्टीवार, प्रकाश भारसाकले कांग्रेस में शामिल हुए। बाद में वे उपचुनाव में चुने गए। इस दौरान हुए चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, लेकिन विदर्भ में विशेष सुधार नहीं आया। 2009 में कांग्रेस-राकांपा गठबंधन को 27 सीटें मिली तथा भाजपा-सेना युति ने अपना प्रदर्शन बेहतरीन रखते हुए 32 सीटें अपनी झोली में डाली।