नागपुर. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने विधान परिषद सभापति शिवाजीराव देशमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की है। गुरुवार को राकांपा की तरफ से इससे संबंिधत पत्र विधानसभा सचिवालय को सौंपा गया। विधान परिषद में विपक्ष के नेता का नाम नहीं किए जाने की वजह से राकांपा नाराज है। विधान परिषद में सबसे बड़ा दल होने के नाते राकांपा ने विपक्ष के नेता पद पर दावा किया है।
राकांपा प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने कहा कि विप के सभापित शिवाजीराव देशमुख सदन का विश्वास खो चुके हैं। इसलिए हमने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। हमने विधानमंडल सचिवालय के प्रधान सचिव अनंत कलसे को पत्र सौंपा है। उन्होंने कहा कि सोमवार को मैंने पार्टी के वरिष्ठ नेता अजित पवार के साथ देशमुख से मुलाकात कर धनंजय मुंडे को विपक्ष के नेता घोषित किए जाने की मांग की थी।
हमनें उन्हें इस आशय का पत्र भी सौंपा था। लेिकन उन्होंने हमारी बात को गंभीरता से नहीं लिया। गुरुवार को हमने फिर उनसे अपनी मांग दोहराई। लेकिन उनका रवैया पहले जैसा ही रहा, जबकि इस बारे में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मािणकराव ठाकरे ने कहा कि राकांपा के इस रवैए का हमें पहले से ही आभास था। हमने भी सुना है कि राकांपा विधान परिषद सभापित के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला रही है। हम राकांपा नेताओं से बात कर यह मसला सुलझा लेंगे।
मुझे पता है, कब कौन सा फैसला लेना है
विप सभापति देशमुख का कहना है कि मैं 37 सालों से विधायक हूं। मुझे पता है कि कब कौन सा फैसला लेना है। किसी फैसले के लिए मुझ पर दबाव डाला जाना ठीक नहीं है। विधानमंडल सचिवालय के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव पर तीन दिनों के भीतर फैसला लेना पड़ता है। यदि प्रस्ताव उचित माना जाता है तो सात दिनों के भीतर सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाना जरूरी होता है। विधान परिषद में राकांपा के 28 सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 22 है। भाजपा के पास 10 और शिवसेना के 6 सदस्य हैं।