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बेमौसम बारिश बना विपक्ष का नया हथियार, दूसरे सप्ताह भी हंगामे के आसार

7 वर्ष पहले
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नागपुर. सूखे और राहत पैकेज पर नागपुर अधिवेशन का पहला सप्ताह हंगामेदार रहा। लग रहा था कि दूसरा सप्ताह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन बेमौसम बारिश और ओले से किसान की फिर तबाह हुई फसल ने विपक्ष को एक और हथियार दे दिया है। ऐसे में दूसरा सप्ताह भी हंगामेदार रहने की संभावना जताई जा रही है। दूसरे सप्ताह में पटल पर केलकर समिति की रिपोर्ट, लोकलेखा और कैग की रिपोर्ट भी रखे जाने का अनुमान है। इस बहाने सत्तापक्ष को भी विपक्ष को घेरने का मौका मिल सकता है।
सोमवार से शुरू होने वाले दूसरे सप्ताह में विधानसभा से राकांपा के बर्हिगमन और विधानपरिषद के सभापति शिवाजीराव देशमुख के खिलाफ राकांपा के अविश्वास प्रस्ताव पर भी निर्णय होने की संभावना है। जितेंद्र आव्हाड के निलंबन पर राकांपा ने विधानसभा से बर्हिगमन का निर्णय लिया है। संभवत: इसका कोई हल निकल सकता है। विधानपरिषद सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर भी कोई सहमति बनने की संभावना है। फिलहाल ज्वलंत मुद्दा अब नाशिक सहित कुछ जिलों में बेमौसम बारिश और ओलों के कारण फसल को हुए नुकसान पर है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, पूर्व मंत्री छगन भुजबल समेत अनेक लोग यहां दौरा करने पहुंचे थे। विदर्भ में हल्की-फुल्की बारिश और बादलों ने फसलों पर असर दिखाया है। इसे लेकर सरकार फिर निशाने पर होगी। विशेषकर सबका ध्यान केलकर समिति, लोकलेखा समिति और कैग की रिपोर्ट पर है। दूसरे सप्ताह सभी रिपोर्ट सदन के पटल पर आने की संभावना है। पिछली सरकार ने राज्य में प्रादेशिक संतुलन साधने डॉ. विजय केलकर की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति ने विदर्भ, मराठवाडा के अनेक जिलों में पिछड़ेपन का अध्ययन किया।
रिपोर्ट तत्कालीन आघाड़ी सरकार को सौंपी गई है। रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। खबर के मुताबिक, रिपोर्ट में कहा गया कि विदर्भ विकास के लिए योजनाओं के मार्फत जो पैसा दिया गया है, वह खर्च ही नहीं हुआ है। कुल 16 हजार करोड़ में से 8 हजार करोड़ रुपए ही प्रशासन द्वारा खर्च किए जाने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। ऐसे में दूसरा सप्ताह भी हंगामेदार रहने की संभावना है। किसान पद यात्रा आंदोलन पर