पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Yavatmal Leading From From In Child Marriage Of Vidarbha Cases

विदर्भ के यवतमाल में होते हैं सबसे ज्यादा बालविवाह!

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

नागपुर. तमाम प्रयासों केबावजूद बाल विवाह जैसी कुप्रथा का अंत नहीं हो पा रहा है। हाल ही में आई यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि विदर्भ में यवतमाल में सबसे ज्यादा बालविवाह होते हैं। रिपोर्ट के अनुसार साल 2013 के शुरूआती तीन महीनों में बाल विवाह के 42 मामले सामने आए हैं। यूनिसेफ की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि देश में 47 फीसदी बालिकाओं की शादी 18 वर्ष से कम उम्र में कर दी जाती है और 22 फीसदी बालिकाएं 18 वर्ष से पहले ही मां बन जाती हैं। यह रिपोर्ट हमारे सामाजिक जीवन के उस स्याह पहलू कि ओर इशारा करती है जिसे अक्सर हम रीति-रिवाज़ व परम्परा के नाम पर अनदेखा करते हैं।

यवतमाल की बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष डा जयंत देशमुख ने बताया कि यवतमाल जिले में साल में तकरीबन हज़ार या उससे भी ज्यादा बाल विवाह होते हैं।इतना ही नहीं बल्कि 13 साल तक के बच्चों की शादियों के मामले भी सामने आ रहे हैं।
दुष्परिणाम
- कुपोषित बच्चों की जन्म दर में बढ़ोत्तरी
- नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में इजाफा
-गर्भपात
मातृ मृत्यु। अध्ययनों से यह सिद्ध हो चुका है कि 15 वर्ष की उम्र में मां बनने से मातृ मृत्यु की संभावना 20 वर्ष की उम्र में मां बनने से पांच गुना अधिक होती है।

यहां काम कर रहा है यूनीसेफ
-भाभुलगाँव
-दारवाह
-वणी
-यवतमाल
-पांडरकवड़ा
-घाटनजी
-जऱी


आदिवासियों में प्रचलन ज्यादा
यूनिसेफ के मुताबिक इस क्षेत्र के कोलम ,गोंड ,पारदी ,नाथजोगी ,प्रधान ,बंजारा और आंत जैसे आदिवासी समुदायों में बाल विवाह का प्रचलन ज्यादा है।

यवतमाल जिले में प्रति वर्ष बाल विवाह की संख्या बढ़ती ही जा रही है। हमारा सूचना तंत्र कमज़ोर है। बाल विवाह लड़कियों की खरीद फरोख्त का एक सामाजिक जरिया बनता जा रहा है , शादी करने पर माता -पिता को मोटी रकम मिल जाती है।
-डा जयंत देशमुख,अध्यक्ष,बाल कल्याण समिति

क्या है बाल विवाह
कानून द्वारा परिभाषित उम्र जो कि बालकों के लिए 21 वर्ष और बालिकाओं के लिए 18 वर्ष है, से कम उम्र में किया गया विवाह बालविवाह है। यह तो एक सामान्य तकनीकी परिभाषा है लेकिन इसकी व्यापकता और विकरालता को हम इस तरह से समझ सकते हैं कि बालविवाह, बच्चों के सभी बाल अधिकारों का उल्लंघन करता है । यह बच्चे के शिक्षा, स्वास्थ्य, सर्वांगीण विकास, सहभागिता और जीवन के अधिकार को चुनौती देता है।

देश में सबसे ज्यादा बालविवाह बिहार में
राष्टीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों (2005-06) की मानें तो हम पाते हैं कि भारत में 474 प्रतिशत महिलाओं का विवाह 18 साल के पूर्व हो गया था। प्रदेश स्तर पर जाएं तो बाल विवाह का सर्वाधिक प्रचलन बिहार (690 प्रतिशत), राजस्थान (652 प्रतिशत) तथा झारखण्ड (632 प्रतिशत) में पाया गया। बाल विवाह का सबसे कम प्रचलन गोवा (121 प्रतिशत), हिमाचल प्रदेश (123 प्रतिशत) व मणिपुर में (129 प्रतिशत) में पाया गया।