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यवतमाल विधानसभा सीट पर अपनों की अपनों से जंग

7 वर्ष पहले
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यवतमाल. जिले के राजनीतिक इतिहास में वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव बेहद रोचक होंगे। महायुति के साथ ही आघाड़ी के कारण चुनावी महाभारत में अपनों से अपनों की जंग होगी। ऐन चुनाव के मुहाने जिला परिषद में सेना ने राकांपा के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया। नए सिरे से सत्ता स्थापित करने के लिए एक बार फिर कांग्रेस-राकांपा मिलन हुआ जिसे देख जनता ठगी सी रह गई। अनुमान था कि विधानसभा चुनाव में दोनों दल मिलकर मैदान में उतरेंगे, लेकिन राकांपा के विधान परिषद सदस्य संदीप बाजोरिया के विस चुनाव की पूर्व तैयारी से संभ्रम की स्थिति निर्माण हो गई थी।
कांग्रेस ने शुक्रवार देर शाम तक केवल उमरखेड़, वणी, रालेगांव-बाभुलगांव-कलंब सीट के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा की थी, लेकिन यवतमाल सीट को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। हालांकि कांग्रेस के दिवंगत विधायक नीलेश पारवेकर की पत्नी नंदिनी पारवेकर को टिकट मिलने की चर्चा जोरों पर है। उधर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष माणिकराव ठाकरे भी अपने सुुपुत्र को टिकट दिलवाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं लेकिन उनके सुपुत्र को उनकी गृह तहसील दारव्हा-दिग्रस-नेर निर्वाचन क्षेत्र से टिकट दिए जाने का अनुमान है। रालेगांव-आर्णी निर्वाचन क्षेत्र से वर्तमान सामाजिक न्यायमंत्री एड. शिवाजीराव मोघे को टिकट मिलने की संभावना है। पुसद में नाईक घराने को टक्कर देने के लिए दमदार प्रत्याशी की कांग्रेस को आवश्यकता है। इस सीट से कांग्रेस किसे मैदान में उतारती है इस ओर सभी की निगाहें लगी हुई हैं।
उधर राकांपा भी सातों सीटों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतार रही है। यवतमाल से राकांपा विधायक संदीप बाजोरिया पहले से ही खम ठोंककर तैयार हैं और पुसद में मनोहरराव नाईक का मैदान में उतरना तय माना जा रहा है। हालांकि पूर्व में उनके पुत्र के चुनाव लडऩे की चर्चा थी, लेकिन जो हालात पैदा हुए हैं उनमें पार्टी किसी भी तरह का खतरा मोल नहीं ले सकती। उधर भाजपा-सेना खेमों में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है।
भाजपा के दो दिग्गजों ने शुक्रवार को यवतमाल सीट के लिए नामांकन दाखिल किए जिनमें से एक निर्दलीय के तौर पर दाखिल किया गया है। इनमें पूर्व विधायक मदन येरावार ने जहां भाजपा की ओर से फार्म दाखिल किया है, तो ऐन लोकसभा चुनाव के मुहाने पर राकांपा से भाजपा में प्रवेश करने वाले चंद्रकांत गाडे पाटील ने निर्दलीय के तौर पर पर्चा दाखिल किया है। दूसरी ओर सेना प्रत्याशी भी मैदान में उतर रहे हैं। ऐसे में अपनों के साथ अपनों की लड़ाई का यह महाभारत देखना जनता के लिए भी कम दिलचस्प न होगा।