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सत्ता बचाने 'हाइजैक' पार्टी को टूट-फूट से बचाने के लिए भाजपा के सदस्य इंदौर रवाना

7 वर्ष पहले
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नागपुर. विधानसभा चुनाव से पहले 21 सितंबर को होने जा रहे जिला परिषद के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव को अधिक महत्व मिल गया है। तेजी से राजनीतिक समीकरण बदलने लगे हैं। परिवर्तन की चर्चाओं के बीच अपनी सत्ता टिकाये रखने के लिए भाजपा ने पूरा जोर लगा दिया है। पार्टी को टूट-फूट से बचाने के लिए भाजपा अपने सभी सदस्य सहित बुधवार को इंदौर के लिए रवाना हो गई। बताया जा रहा है कि भाजपा में अध्यक्ष पद के लिए अनेक दावेदार हैं। पार्टी को एकजुट रखने पर्यटन स्थल पर जाने की सूचना है।
अंतिम निर्णय वाड़े से
फिलहाल राष्ट्रवादी कांग्रेस किंग मेकर की भूमिका में है, लेकिन अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। भाजपा ऊहापोह की स्थिति में है। अल्पमत से बचने अब भाजपा ने आरपीआई और बसपा सदस्यों को भी अपने साथ लाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। हालांकि भाजपा में ही अध्यक्ष पद के लिए अनेक दावेदार सामने आ रहे हैं। अंतिम निर्णय वाड़े से होगा।
इस कारण आशंका
जिला परिषद में कुल सदस्यों की संख्या 59 है। भाजपा के 21, (वाड़ी को नगरपरिषद का दर्जा मिलने से प्रेम झाड़े की सदस्यता रद्द हुई है) शिवसेना के 7, गोंडवाना पार्टी के 1 सदस्य, कुल 29 सदस्य हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस-कांग्रेस एक होती है और साथ में बसपा, रिपाई और शिवसेना के एक बागी सदस्य को साथ लेती है तो उसका आंकड़ा भी 29 तक पहुंच जाता है। ऐसे में दोनों का आंकड़ा 29 पर आकर रुकता है। इस कारण तोड़-फोड़ की आशंका ज्यादा बनी है। भाजपा किसी भी हालत में जिप की सत्ता टिकाये रखना चाहती है।
कांग्रेस, राष्ट्रवादी सहित बसपा, रिपाई, गोंडवाना और कुछ बागी सदस्यों को विश्वास में लेकर सत्ता बनाने की तैयारी में हैं। विधानसभा में अगर महायुति नहीं होती है तो शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी द्वारा मिलकर सत्ता बनाने से भी इनकार नहीं किया जा सकता। साथ में बसपा, रिपाई को भी लेने की संभावना है। नया समीकरण 34 का आंकड़ा आसानी पार कर सकता है। ऐसे में भाजपा को अलग-थलग कर सत्ता बनाने के प्रयास भी चल रहे है।
ढाई साल पहले का वाक्या
ढाई साल पहले हुए अध्यक्ष पद चुनाव में भाजपा सदस्य निशा सावरकर, शिवसेना की पुष्पा देशभ्रतार और भारती गोडबोले ने बगावत कर, कांग्रेस से हाथ मिलाया था। लेकिन ऐन वक्त पर राष्ट्रवादी कांग्रेस द्वारा भाजपा का साथ देने से तीनों सदस्य महायुति में लौट आए थे। फिलहाल राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में सत्ताधारी आघाड़ी कायम रहेगी या नहीं, यह बड़ा सवाल बन गया है। इस परिस्थिति में राष्ट्रवादी कांग्रेस किंग मेकर की भूमिका निभाने की स्थिति में आ गई है। सत्ता पाने राकांपा से युति करनी होगी। लिहाजा कौन बाजी रहेगा, इस पर सबका ध्यान लगा है।
(हैदराबाद हाउस में ईवीएम मशीन की सुरक्षा में तैनात जवान)