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पवार ने दिखाया पॉवर, नौ निर्दलीय विधायक राकांपा में शामिल

7 वर्ष पहले
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(उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने 9 विधायकों को एनसीपी ज्वाइन करवाई)
मुंबई। कांग्रेस के बाद अब राकांपा में भी निर्दलीय विधायकों की ‘इनकमिंग’ शुरू हुई है। उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने सोमवार को अपना राजनीतिक पॉवर दिखाया और 9 निर्दलीय विधायकों ने एक झटके में राकांपा में प्रवेश किया। उप मुख्यमंत्री पवार, प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे और लोक निर्माण मंत्री छगन भुजबल की उपस्थित में जिन 9 निर्दलीय विधायकों ने राकांपा में प्रवेश किया। उसमें दिलीप सोपल(बार्शी), मकरंद जाधव (वाई), रमेश थोरात (दौंड), बालासाहेब पाटिल (उत्तर कराड),साहेबराव पाटिल (अंमलनेर), शरद गावित (नवापुर), मानसिंह नाईक (शिराला), सुरेश देशमुख (वर्धा) और बाबासाहेब पाटिल (अहमदपुर) का समावेश है। हालांकि तीन और निर्दलीय विधायक विलास लांडे (भोसरी), लक्ष्मण जगताप (चिंचवड) और रवि राणा(बड़नेरा) भी सोमवार को राकांपा में शामिल होने वाले थे। मगर कुछ वजहों से ये तीन विधायक प्रेस कांफ्रेंस में उपस्थित नहीं थे। पवार ने कहा कि जल्द होने वाली इस प्रकार की दूसरी प्रेस कांफ्रेंस में ये तीनों विधायक भी राकांपा में प्रवेश करेंगे।
राणे समर्थक तीन नेता अब राकांपा में :-
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं उद्योग मंत्री नारायण राणे के कट्टर समर्थक पूर्व विधान परिषद सदस्य राजन तेली न भी सोमवार को राकांपा में प्रवेश किया। उनके साथ काका कुडालकर और मनोज नाईक ने भी राणे और कांग्रेस का ‘हाथ’ छोड़कर राकांपा में प्रवेश किया है। माना जा रहा है कि तेली को राकांपा सावंतवाड़ी विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवारी देने वाली है। 2009में इस सीट से दीपक केसरकर राकांपा के टिकट पर चुनाव जीते थे। परंतु हाल ही में उन्होंने राकांपा छोड़कर शिवसेना में प्रवेश किया है। वैसे सोमवार को जिन 9 निर्दलीय विधायकों ने राकांपा में प्रवेश किया। वे पहले से ही राकांपा समर्थक कहे जाते थे। दिलीप सोपल को तो राकांपा सुप्रीमो शरद पवार ने लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद अपनी पार्टी के कोटे से राज्य सरकार में जल आपूर्ति मंत्री बनाया है। इसके अलावा राकांपा में शामिल होने वाले कुछ एेसे विधायक हैं, जिन्होंने 2009 में पार्टी से बगावत करके निर्दलीय चुनाव लड़ा था और विधायक बने थे।
कांग्रेस के ‘चौके’ पर राकांपा का ‘नहला’
कांग्रेस और राकांपा के बीच सीट बंटवारे को लेकर जोरदार खींचतान शुरू है। दोनों दल अपनी-अपनी सिटिंग और अपने समर्थक निर्दलीय विधायकों की सीट सैद्धांतिक रूप से एक-दूसरे के लिए छोड़ने को राजी है। यही कारण है कि 10 सितंबर को कांग्रेस ने पहल करते हुए शिरीष चौधरी, सुरेश जेथलिया, वसंतराव चव्हाण और जयकुमार गोरे इन चार विधायकों को पार्टी में शामिल कर राकांपा पर इन चार विधायकों की सीट छोड़ने का दबाव बनाया। अब राकांपा ने नौ विधायकों को पार्टी में शामिल कराकर अपने कोटे की नौ सीटें बढ़ाने का दांव खेला है।