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वीराने में किसी स्वर्ग से कम नहीं एक संत की यह समाधि

5 वर्ष पहले
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पुणे/नागपुर: महाराष्ट्र टूरिज्म फरवरी में नागपुर महोत्सव का आयोजन कर रहा है। इस महोत्सव का मकसद विदर्भ के टूरिज्म स्पॉट्स से देश को परिचित करवाना है। इस मौके पर dainikbhaskar.com आपको विदर्भ के फेमस संत गजानन महाराज के समाधि स्थल आनंद सागर के बारे में बताने जा रहा है। गजानन महाराज के लिए कहा जाता है कि इनके एक इशारे पर सूखे कुएं में पानी भर जाता था और आंखों के तेज से आग लग जाती थी। कौन थे गजानन महाराज...
- गजानन महाराज के जन्म के स्थान और समय के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है। पहली बार उन्हें शेगांव में 23 फरवरी 1878 को बनकट लाला और दामोदर नाम के दो व्यक्तियों ने देखा था।
- वे एक जूठी पत्तल में से चावल खाते हुए 'गं गं गणात बूते' का उच्चारण कर रहे थे। 'गं गं गणात बूते' का उच्चारण करने के कारण ही उनका नाम गजानन पड़ा।
- गजानन महाराज नाथ संप्रदाय के दिगंबर संत थे। इन्हें भगवान दत्तात्रेय के तीसरे तथा अंतिम अवतार के रूप में भी पूजा जाता है।
- मृत्यु से पहले गजानन महाराज ने अपने भक्तों को समय और स्थान बता दिया था।
- 8 सितंबर 1910 को सुबह 8 बजे बाबा ने महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के शेगांव में समाधि ली। इसी स्थान पर आज उनका एक विशाल मंदिर है।
- यहां उनकी प्रतिमा के अलावा पादुका, महाराज का चिमटा, औजार, चिलम और प्राचीन हनुमान प्रतिमा मौजूद है।
- अपने चमत्कार के लिए प्रसिद्ध संत गजानन के लिए कहा जाता है कि इनके एक इशारे पर सूखे कुएं में पानी भर जाता था। इनकी आंखों के तेज से सूखी घांस जलने लगती थी।
- बाबा हाथ लगाकर रोगियों को ठीक कर देते थे और भक्तों का मन पढ़ लेते थे। विदर्भ में आज भी उन्हें भोग लगाए बिना लोग भोजन नहीं करते हैं।
क्या खास है यहां?
- मुख्य मंदिर से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर आनंद सागर उद्यान, आध्यात्मिक स्थल व ध्यान केंद्र स्थित है।
- 325 एकड़ के क्षेत्र में फैला आनंद सागर एक सुंदर और सुसज्जित आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र है।
- जिसमें करीब 50,000 अलग-अलग प्रकार के वृक्ष, फूल और हजारों लताएं हैं।
- इसके 50 एकड़ क्षेत्र में एक विशाल तालाब बनाया गया है, जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।
- तालाब के मध्य में टापू नुमा स्थान पर ध्यान केंद्र बनाया गया है, जो विवेकानंद केंद्र (कन्याकुमारी) का प्रतिरूप है।
- यहां जाने के लिए पैदल रास्ते के अलावा वॉटर बोट की व्यवस्था भी है।
- यहां बच्चों के खेलने के लिए पार्क, वाटर पार्क और टॉय ट्रेन है, जिसमें बैठ कर पूरे इलाके की सैर की जा सकती है।
- इसके अलावा यहां म्यूजिकल फाउंटेन, फिश म्यूजियम और कई छोटे-बड़े मंदिर हैं।
- इस पूरे इलाके में पैदल घूमने पर तकरीबन 3-4 घंटे का समय लगता है।
- यहां प्रतिदिन लगभग 25 से 30 हजार लोग दर्शन करने आते हैं।
स्वर्ग से कम नहीं है यह स्थान.
- महाराष्ट्र का बुलढाणा जिला विदर्भ रीजन में आता है।
- विदर्भ का यह जिला लगभग पूरे साल पानी की समस्या से जूझता है।
- फसलों की बर्बादी और किसानों की आत्महत्या से जुड़े मामले यहां अक्सर सुनने को मिलते हैं।
- ऐसे इलाके में बने आनंद सागर को स्थानीय लोग 'विदर्भ का स्वर्ग!' कहकर संबोधित करते हैं।
आगे की स्लाइड्स में देखिए आनंद सागर की कुछ और PHOTOS...
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