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कभी सड़कों पर गुब्बारे बेचता था ये युवक, एक किताब से 127 देशों में एेसे हुआ फेमस

पांच साल की मेहनत के बाद उनकी पहली किताब लिखने का सपना पूरा हुआ। अब उनकी यह किताब यूरोप से लेकर अमेरिका तक 127 देशों में काफी फेमस हो रही है।

Dainik Bhaskar

Oct 21, 2016, 02:52 PM IST
रोशन भोंडेकर रोशन भोंडेकर
पुणे. यहां के रोशन भोंडेकर नामक आईटी इंजीनियर द्वारा लिखी हुई एक किताब 127 देशों में काफी धूम मचा रही है। पांच साल की मेहनत के बाद उनकी पहली किताब लिखने का सपना पूरा हुआ। रोशन कभी नाजुक आर्थिक हालत के कारण सड़कों पर गुब्बारे बेचते थे। किताब लिखने का कैसे आया आइडिया....
-मूल रुप से भंडारा के तुमसर के रहने वाले रोशन भोंडेकर फिलहाल पुणे स्थित एक मल्टीनेशनल आईटी कंपनी में सॉफ्टेवयर की जॉॅब करते हैं।
- रोशन पिछले पांच साल से किताब लिखने की सोच रहे थे। आखिर उनका यह सपना पिछले साल पूरा हुआ।
-अगस्त 2015 में रोशन भोंडेकर द्वारा लिखित बुक ‘लव द कि टू ऑपटीमिसम’ पब्लिश हुई।
-एक साल के भीतर ही इस किताब को दुनिया के 127 देशों के पाठकों से श्रेष्ठ और व्यापक समर्थन मिल रहा है।
-यह किताब अमेजन, फ्लिप कार्ट, गूगल और विभिन्न देशों के पुस्तकालयों में खूब बिक रही हैं।
क्या खास है इस किताब में
-इस किताब मे ‘प्रेम’ शब्द का उपयोग, जीवन मे सफल होने के लिए खुद को कैसे विकसित किया जाये इसपर विस्तारित विवरण किया गया है |
-जीवन मे आने वाले मुश्किल परिस्थितियों पर किस तरह काबू पाया जाये ये इस किताब में 42 अध्याय)के माध्यम से बताया गया है।
-रोशन ने dainikbhaskar.com से बात करते कहा कि अमेरिका और यूरोप में इस किताब की डिमांड बढ़ गई है।
-उनके जीवन में किए हुआ संघर्ष और गरीबी से सीखे हुए व्यावहारिक अनुभव एस किताब का प्रेरणा स्त्रोत बताया है।
-उन्होंने बताया कि, पुस्तक निश्चय ही युवाओं को डिप्रेशन से निकाल कर नई आंतरिक ऊर्जा प्रदान करती है।
गुब्बारे बेचकर की पढ़ाई
-रोशन बताते हैं कि जब वे दसवींं की पढ़ाई कर रहे तो तब घरवालों की आर्थिक हालत काफी नाजुक थी।
-पिता एक लाइब्रेरी में काम करते थे वहीं मां नाॅन ग्रांट स्कूल में टीचर की जॉॅब करती थी।
-घरवालों की आर्थिक तंगी के चलते रोशन अपनी स्कूल की फीस भी नहीं भर पाते थे।
-एेसे उन्होंने गुब्बारे बेचकर दसवीं की परीक्षा की फीस जुटाई और अपनी पढ़ाई पूरी की।
-बाद में पड़ोसी और परिजनों के मदद से पोलिटेक्निक की पढ़ाई के लिए नागपुर पहुंचे।
-इसके बाद सतारा जिले के कराड़ से बी. ई की पढ़ाई पूरी की और पुणे में जॉॅब शुरु की।
आगे की स्लाइड्स में देखें रोशन भोंडे की कुछ फोटोज ...
रोशन की किताब की 127  देशों में काफी सराहना हो रही है। रोशन की किताब की 127 देशों में काफी सराहना हो रही है।
विदेशी युवाओं को यह किताब खूब पंसद आ रही है। विदेशी युवाओं को यह किताब खूब पंसद आ रही है।
देश विदेश के बुक एक्जीबिशन में यह किताब खूब बिकी है। देश विदेश के बुक एक्जीबिशन में यह किताब खूब बिकी है।
रोशन स्कूलों में जाकर बच्चों के लिए स्पिरिचुअल लेक्चर भी देते हैं। रोशन स्कूलों में जाकर बच्चों के लिए स्पिरिचुअल लेक्चर भी देते हैं।
अपनी किताब की राॅयल्टी की फिसदी रकम अनाथ बच्चों के लिए खर्च करने वाले हैं। अपनी किताब की राॅयल्टी की फिसदी रकम अनाथ बच्चों के लिए खर्च करने वाले हैं।
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रोशन भोंडेकररोशन भोंडेकर
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विदेशी युवाओं को यह किताब खूब पंसद आ रही है।विदेशी युवाओं को यह किताब खूब पंसद आ रही है।
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रोशन स्कूलों में जाकर बच्चों के लिए स्पिरिचुअल लेक्चर भी देते हैं।रोशन स्कूलों में जाकर बच्चों के लिए स्पिरिचुअल लेक्चर भी देते हैं।
अपनी किताब की राॅयल्टी की फिसदी रकम अनाथ बच्चों के लिए खर्च करने वाले हैं।अपनी किताब की राॅयल्टी की फिसदी रकम अनाथ बच्चों के लिए खर्च करने वाले हैं।
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