बचाई गई सबसे छोटी बच्ची की जान, लंबाई थी 30Cm, वजन था सिर्फ 600 ग्राम / बचाई गई सबसे छोटी बच्ची की जान, लंबाई थी 30Cm, वजन था सिर्फ 600 ग्राम

104 दिनों बाद आखिरकार मुंबई के डॉक्टरों ने देश की सबसे छोटी और सबसे कम वजन वाली बच्ची को बचाने में सफलता हासिल कर ली। बच्ची जब पैदा हुई थी तो उसकी लंबाई सिर्फ 31 सेंटीमीटर थी और वजन सिर्फ 600 ग्राम।

dainikbhaskar.com

Dec 21, 2016, 01:21 PM IST
नाइजीरियन दंपति एल्विस और स्‍ नाइजीरियन दंपति एल्विस और स्‍
मुंबई। 104 दिनों बाद आखिरकार मुंबई के डॉक्टरों ने देश की सबसे छोटी और सबसे कम वजन वाली बच्ची को बचाने में सफलता हासिल कर ली। बच्ची जब पैदा हुई थी तो उसकी लंबाई सिर्फ 31 सेंटीमीटर थी और वजन सिर्फ 600 ग्राम। खतरे में थी मां और बच्ची की जान ..
- यह कारनामा कर दिखाया है मुंबई के सूर्य हॉस्पिटल एंड चाइल्ड केयर के डॉ. नंदकिशोर काबरा और उनकी टीम ने।
- इसी टीम से जुड़े डॉ हरिबल्कृष्ण बालासुब्रमण्यम ने dainikbhaskar.com को बताया कि, नाइजीरियन दंपति एल्विस और स्टेला की शादी के 8 साल बाद भी जब उन्हें कोई संतान नहीं हुई तो वे मुंबई आ गए।
- यहां कई कोशिशों के बाद स्टेला गर्भवती हुई और डॉक्‍टरों ने बताया कि उनके पेट में तीन बच्चे हैं।
- स्टेला को कई मेडिकल प्रॉब्लम्स थी और तीन बच्चे उनकी जान के लिए खतरा साबित हो सकते थे। ऐसे में उन्‍होंने सिर्फ दो बच्चे रखने पर सहमति बनाई।
- डॉ बालासुब्रमण्यम ने बताया कि, स्टेला के गर्भधारण करने के सिर्फ 23 सप्ताह बाद अगस्त महीने में अचानक एक दिन दर्द शुरू हुआ।
- इसके बाद उन्हें मीरा रोड़ अस्‍पताल ले जाया गया। जहां हालत बिगड़ने के बाद उन्हें सूर्या हॉस्पिटल ले जाया गया।
- इसके दो दिन बाद स्टेला ने दो बच्चियों को जन्म दिया। सिर्फ 6 महीने में पैदा हुई इन बच्चियों की लंबाई सिर्फ 31 सेंटीमीटर थी और वजन 600 ग्राम था।

ऐसे बची बच्ची की जान
- डॉ बालासुब्रमण्यम ने बताया कि, प्रेगनेंसी के दौरान जो जरुरी दवाएं एक महिला को दी जानी चाहिए थी वह स्टेला को नहीं दी गई थी। जिस कारण उनका कांप्लीकेशन बढ़ गया।
- क्विक डिलीवरी के कारण दोनों बच्चियों के लंग्स पूरी तरह से विकसित नहीं हुए थे। उसके बाद दोनों को एनआईसीयू में ले जाया गया। जहां दो हफ्तों बाद इनमें से एक बच्‍ची की मौत हो गई।
- इसके बाद गोल्डन नाम की दूसरी बच्ची को 18 दिनों तक वेंटीलेटर पर रखा गया। डॉ बालासुब्रमण्यम के मुताबिक ऐसे बच्चों के बचने का प्रतिशत सिर्फ 40 परसेंट रहता है, लेकिन डॉ नंदकिशोर और उनकी टीम के प्रयास से इस बच्ची को बचाया जा सका।
- यह बच्ची तकरीबन 104 दिनों तक हॉस्पिटल के एक्सपट्र्स डॉक्टर की निगरानी में रही और आखिरकार इसे एक दम फिट कर घर भेजा गया।
बच्ची का वजन 2.5 किलोग्राम हुआ
- बच्ची के माता-पिता इसे एक चमत्कार से कम नहीं मानते। एल्विस ने बताया कि, हमारे लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था।
- हम बच्ची हमारे लिए बेहद कीमती है इसलिए हमने इस बच्ची का नाम गोल्डन रखा है।
- अब यह बिलकुल स्वस्थ है और इसका वजन भी बढ़कर 2.5 किलोग्राम हो गया है।
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नाइजीरियन दंपति एल्विस और स्‍नाइजीरियन दंपति एल्विस और स्‍
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