(बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे की फाइल तस्वीर)
मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में बुधवार का दिन बेहद अहम साबित होने की संभावना है। महायुति में चल रहे महाभारत को खत्म करने भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जहां मुंबई दौरे पर आ रहे हैं,वहीं उद्धव ठाकरे ने भी शिवसेना के तमाम बड़े नेताओं को महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए बुलाया है।
महाराष्ट्र में 15 अक्टूबर को विधानसभा का चुनाव होने वाला है। परंतु अब तक शिवसेना-भाजपा के बीच सीट बंटवारे और मुख्यमंत्री पद को लेकर टकराव जारी है। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने सोमवार को साफ शब्दों में कहा कि भाजपा को विधानसभा की 135 सीटें देना शिवसेना के लिए संभव नहीं है। उनकी इस घोषणा के बाद से महाराष्ट्र में 25 साल पुराने शिवसेना-भाजपा गठबंधन के टूटने की अटकलें हैं।
शाह का उद्धव से मुलाकात का वक्त तय नहीं!
भाजपा अध्यक्ष भले ही बुधवार को मुंबई दौरे पर आ रहे हैं, परंतु उनके तय कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे से मुलाकात का वक्त निश्चित नहीं है। ध्यान रहे कि इससे पहले 4 सितंबर को जब शाह मुंबई दौरे पर आये थे, तब भी वे शिवसेना अध्यक्ष उद्धव के निमंत्रण पर उनसे मिलने मातोश्री गये थे। शिवसेना और भाजपा दोनों दलों के बड़े नेताओं का कहना है कि बुधवार को सीट बंटवारे का मुद्दा या तो हल हो जायेगा या फिर दोनों पार्टियों की विधानसभा चुनाव को लेकर भूमिका स्पष्ट हो जायेगी।
आठवले ने उद्धव को समझाया कहा- विधानसभा चुनाव जीतना अब आसान नहीं
शिवसेना-भाजपा गठबंधन टूटने की बढ़ती संभावना के बीच मंगलवार को राज्यसभा सदस्य एवं आरपीआई अध्यक्ष रामदास आठवले ने मातोश्री जाकर उद्धव ठाकरे से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि उप चुनाव के आये नतीजों का हवाला देकर उन्होंने उद्धव को यह समझाने की पूरी कोशिश की कि अब महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव बिना महायुति के जीतना आसान नहीं है। शिवसेना अध्यक्ष से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए आठवले ने कहा कि महाराष्ट्र में कांग्रेस-राकांपा को सत्ता से हटाने के लिए शिवसेना और भाजपा को एक साथ मिलकर चुनाव लड़ना पड़ेगा।