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पश्चिम महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को भाजपा की चुनौती

7 वर्ष पहले
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पुणे. पश्चिम महाराष्ट्र राष्ट्रवादी कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। पुणे, सातारा, सांगली, कोल्हापुर तथा सोलापुर सहित पांच जिलों में लोकसभा की दस सीटों के लिए हुए चुनाव में राकांपा ने चार सीटों पर जीत दर्ज की हैं। दस निर्वाचन क्षेत्रों के अंतर्गत कुल साठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं। वर्तमान में राकांपा के 22 विधायक हैं। अधिकांश स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं पर राकांपा की पकड़ है, लेकिन अब प. महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती ताकत राकांपा के लिए नई चुनौती बन रही है।
लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की लहर का काफी असर पश्चिम महाराष्ट्र की राजनीति पर हुआ है। पुणे, सांगली, सोलापुर में भाजपा के सांसद जीतकर आए हैं। मोदी की लहर भले ही कुछ थम-सी गई हो, लेकिन भाजपा मजबूत होती दिखाई दे रही है।
घोरपड़े देंगे आबा को चुनौती
सांगली के भाजपा के सांसद संजय पाटील ने विधानसभा चुनाव की कमान संभाली है। अपने कड़े विरोधीगृहमंत्री आर.आर. पाटील को उनके निर्वाचन क्षेत्र तासगांव-कवठेमहांकाल में ही मात देने का उन्होंने बीड़ा उठाया है। राकांपा के पूर्व मंत्री अजित घोरपड़े भाजपा में प्रवेश कर गृहमंत्री को चुनौती देंगे। वर्तमान में सांगली जिले के तीन विधायक भाजपा के ही हैं। पुणे जिले के इंदापुर निर्वाचन क्षेत्र से सहकार मंत्री हर्षवर्धन पाटील का राज हटाने के लिए भाजपा जिला परिषद के अध्यक्ष दत्ता भरणे को ही पार्टी में लाने का प्रयास कर रही है।
भरणे राकांपा के स्थानीय नेता हैं और सहकार मंत्री के विरोधी हैं। उन्होंने भी सहकार मंत्री के विरोध में लडऩे की तैयारी शुरू कर दी है। पुणे जिले में चार विधायक भाजपा के हैं।
सोलापुर में दो विधायक तथा कोल्हापुर में एक विधायक भाजपा के हैं। अपनी बढ़ती ताकत देख भाजपा को भी पश्चिम महाराष्ट्र में अधिक सीटें की उम्मीद है। प. महाराष्ट्र में कुल दस विधायक भाजपा के हैं।
दलबदल के लिए इच्छुक

शिवसेना भी पश्चिम महाराष्ट्र में अपनी ताकत बढ़ाने में जुटी हुई है। पार्टी के प्रमुख उध्दव ठाकरे खुद पश्चिम महाराष्ट्र पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। वर्तमान में पार्टी के छह विधायक हैं। लोकसभा चुनाव में दो सांसद जीतकर आए हुए हैं। प. महाराष्ट्र में ताकत बढऩे का दावा कांग्रेस भी कर रही है, लेकिन पार्टी का एक भी सांसद लोकसभा चुनाव में जीतकर नहीं आया है। सोलापुर में कांग्रेस के वरिष्ठ मंत्री तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुशीलकुमार शिंदे की करारी हार हुई। सांगली में कांग्रेस के प्रतीक पाटील को मात मिली। जो सीटें हाथों में थी वह भी पार्टी हासिल नहीं कर पाई है। वर्तमान में पार्टी के 12 विधायक हैं।
मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने पार्टी की ताकत बढ़ाने की ठान ली है। राकांपा के साथ आघाड़ी होने के बावजूद कई निर्वाचन क्षेत्रों में दोनों पार्टियों के स्थानीय नेताओं में विवाद चल रहा है। राकांपा को पश्चिम महाराष्ट्र का गढ़ बचाने के लिए काफी कोशिशें करनी पड़ेगी। पार्टी में हो रही बगावत और भाजपा की बढ़ती ताकत की चुनौतियों को सामना भी करना पड़ेगा।