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शिवसेना की सत्ता में भागीदारी के खिलाफ याचिका का सरकार ने किया विरोध

7 वर्ष पहले
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने बंबई उच्च न्यायालय में दायर उस याचिका का विरोध किया है, जिसमें हाल के दिनों में विपक्षी पार्टी रही शिवसेना के सरकार में शामिल होने को चुनौती दी गई है। सरकार ने कहा कि जनहित याचिका संविधान के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।
राज्य के महाधिवक्ता सुनील मनोहर ने दलील दी कि ऐसा कोई नियम नहीं है जो विपक्षी पार्टी को सत्ता पक्ष में शामिल होने से रोकता हो।सामाजिक कार्यकर्ता केतन तिरोडकर की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि शिवसेना का देवेंद्र फडणवीस सरकार में शामिल होने का कदम विधानसभा के नियमों के खिलाफ है, क्योंकि एकबार विश्वास मत हासिल हो जाने के बाद विपक्षी पार्टी के सदस्य कम से कम छह महीने के लिए सत्ता पक्ष में नहीं जा सकते।
महाराष्ट्र विधानसभा नियम और दल बदल निरोधी कानून अदालत को दिखाने के लिए याचिकाकर्ता द्वारा समय मांगने पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले पर सुनवाई 17 दिसंबर तक टाल दी। याचिका में कहा गया है कि शिवसेना कुछ समय पहले तक विपक्ष में थी लेकिन हाल में वह सरकार में शामिल हो गई और उसके 10 विधायक पहले ही मंत्री बन गए हैं।
याचिका में अदालत से गुहार लगाई गई है कि वह विधानसभा अध्यक्ष हरिभाउ बागडे और मुख्यमंत्री फडणवीस को नियम बनाने का निर्देश दे ताकि हाल तक विपक्ष के नेता रहे शिवसेना विधायक एकनाथ शिंदे को छह महीने तक कोई भी मंत्री का पद लेने से रोका जा सके। हालिया मंत्रिमंडल विस्तार में शिंदे को मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण मंत्री (सार्वजनिक उपक्रम) बनाया था। फडणवीस सरकार ने पिछले महीने विधानसभा में ध्वनि मत से विश्वास मत हासिल किया था। उस समय, शिंदे विपक्ष के नेता थे। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि शिवसेना का सरकार में शामिल होना विधिसम्मत नहीं है।