(फोटो- मुंबई नासिक एक्सप्रेसवे)
पुणे. सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के सम्मान में 15 सितंबर को देश में इंजीनियर्स डे मनाया जाता है। उनका जन्म इसी तारीख को सन् 1860 में मैसूर के मुदेनाहल्ली गांव में हुआ था। गरीब परिवार में पैदा हुए विश्वेश्वरैया जब 15 साल के थे, उनके पिता की मौत हो गई। कठिन परिस्थितियों में उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की और फिर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पुणे से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री ली।
आजादी के पहले और ठीक बाद जब देश में आधारभूत परियोजनाओं की नींव रखी जा रही थी, इसमें उन्होंने अहम भूमिका निभाई। साथ ही, इंडस्ट्रीज की शुरुआत में भी उनका अहम योगदान था। एजुकेशन भास्कर में आज चर्चा विश्वेश्वरैया के जीवन के कुछ पहलुओं की। साथ में कुछ ऐसी उपलब्धयों के बारे में जिनके चलते आज भारत इंजीनियरिंग के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है।
इंजीनियरिंग वंडर्स: सबसे लंबे एक्सप्रेस वे
मुंबई नासिक एक्सप्रेसवे
इस हाईवे को भारत के सबसे पुराने हाईवे होने का गौरव प्राप्त है। इसकी
खूबसूरती बेमिसाल है। अगर आप इसके निर्माण पर गौर करें तो आप इसकी तारीफ करते नहीं थकेंगे। एक बात जो इस एक्सप्रेसवे को खास बनती है वो ये की यहां आपको जगह-जगह आपको कई सारे साइनबोर्ड मिलेंगे जिनपर ऐसा बहुत कुछ लिखा है जो आपको रोमांचित करेगा।
मुंबई नासिक एक्सप्रेसवे की लंबाई 150 किमी है। इसको बनाने में 4 हजार करोड़ रूपए खर्च हुए हैं। यह मुंबई को देश के उत्तरी, मध्य और पूर्वी हिस्सों से जोड़ता है।
आगे की स्लाइड में पढ़ें यमुना एक्सप्रेसवे के बारे में