(महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण की फाइल तस्वीर)
मुंबई: पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को अपने पैतृक जिले सातारा की दक्षिण-कराड़ सीट पर कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। चव्हाण शनिवार को यहां से नामांकन भरने वाले हैं। राकांपा ने उनके सामने इस सीट से सात बार विधायक रहे विलासराव पाटिल-उंडालकर को टिकट देने का दांव खेलने की रणनीति बनाई है।
दक्षिण कराड़ सीट से विलासराव कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में लगातार सात बार चुनाव जीते आये हैं। उन्होंने इस बार भी इसी सीट से टिकट मांगा था। मगर चव्हाण ने सूबे का मुख्यमंत्री होने की वजह से इस सीट को अपने पैतृक गांव की सीट बताते हुए पार्टी से उम्मीदवारी हासिल कर ली। जिसकी वजह से अब विलासराव ने कांग्रेस से बगावत करके राकांपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू की है। सातारा जिले के राकांपा के दिग्गज नेता एवं संपर्क मंत्री शशिकांत शिंदे के माध्यम से विलासराव ने
शरद पवार से संपर्क करके चुनाव लड़ने की तैयारी दिखाई है। बताया जा रहा है कि शनिवार को चव्हाण का नामांकन दाखिल होने के बाद राकांपा प्रत्याशी के रूप में विलासराव भी पर्चा भरेंगे। हालांकि चव्हाण इसे अपने लिए चुनौती नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा, ‘कराड़ में मेरा बचपन बिता है। यहां से ही तीन बार मैं सांसद चुना गया था। लिहाजा कराडवासियों की मदद से मैं यह चुनाव निश्चित ही जीतूंगा।’ इसके साथ ही चव्हाण ने कहा कि कराड़ में उन्होंने बड़े पैमाने पर निवेश लाया है। सड़कों के निर्माण से लेकर बुनियादी सुविधाएं स्थानीय लोगों तक पहुंचाने का बड़ा काम भी किया है। हालांकि चव्हाण की जीत सुनिश्चित करने के लिए उनके करीबी माने जाने वाले अतुल भोसले ने कुछ दिनों पहले ही भाजपा में प्रवेश किया है। माना जा रहा है कि भाजपा भोसले को यहां से उम्मीदवार बनायेगी। यदि ऐसा होता है, तो त्रिकोणी संघर्ष में चव्हाण को राजनीतिक लाभ मिलेगा।