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महाराष्ट्र में साढ़े सात लाख किसानों ने छोड़ी खेती-बाड़ी

8 वर्ष पहले
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पुणे/नई दिल्ली.केंद्र और राज्य सरकारों के किसानों की स्थिति में सुधार के तमाम प्रयासों के बावजूद खेती से विमुख होने वाले कृषकों की संख्या पिछले एक दशक में बढ़ी है। महाराष्ट्र में सर्वाधिक सात लाख 56 हजार किसानों ने खेती छोड़ी है। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2001 में देश में 12 करोड़ 73 लाख किसान थे जिनकी संख्या वर्ष 2011 में घटकर 11 करोड़ 87 लाख हो गई। इस प्रकार इनकी संख्या में 80 लाख 60 हजार की गिरावट आई। प्रकृति पर आधारित कृषि, देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ एवं सूखा का प्रकोप, प्राकृतिक आपदा से फसलों की क्षति, तथा ऋणें के बोझ के कारण भी बड़े पैमाने पर किसान खेती छोड़ रहे हैं। पिछले एक दशक के दौरान महाराष्ट्र में सर्वाधिक सात लाख 56 हजार, राजस्थान में चार लाख 78 हजार, असम में तीन लाख 30 हजार और हिमाचल प्रदेश में एक लाख से अधिक किसानों ने खेती छोड़ दी है। उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और मेघालय में भी कृषकों की संख्या घटी है।
कृषि मजदूरों की संख्या बढ़ी
आश्चर्यजनक ढंग से इसी दौरान कृषि मजदूरों की संख्या में वृद्धि हुई है। वर्ष 2001 में जहां 10 करोड़ 68 लाख कृषि मजदूर थे वहीं उनकी संख्या वर्ष 2011 में बढ़कर 14 करोड़ 43 लाख हो गई। उत्तर प्रदेश और बिहार का एक बड़ा हिस्सा नेपाल से निकलने वाली नदियों की बाढ़ से प्रति वर्ष प्रभावित होता है जिसके कारण भी किसानों की भारी आर्थिक क्षति होती है। कई बार तो उनके खेत का स्वरूप ही बदल जाता है और किसान खेती छोड़ने को बाध्य होते हैं। इसी प्रकार देश का एक बड़ा हिस्सा सूखे की चपेट मे आता रहता है।
सूखे से निपटने का कार्यक्रम
प्रो. एच. सी. हनुमंत राव की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय तकनीकी समिति की रिपोर्ट के अनुसार सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यRम के कार्यान्वयन के लिए 7.45 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र चिह्न्ति किया गया है। देश के सोलह राज्यों के 195 ऐसे जिलों मे सूखे से निपटने के लिए अनेक कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अध्ययन के अनुसार वर्ष 2020 तक सिंचित धान की उपज में लगभग चार प्रतिशत की, 2050 तक सात प्रतिशत की तथा वर्ष 2080 तक लगभग दस प्रतिशत की कमी हो सकती है।
सरकार ने शुरू की हैं कई योजनाएं
केंद्र सरकार ने कृषि के विकास में तेजी लाने और इस क्षेत्र में पूंजीनिवेश में वृद्धि के लिए अनेक योजनाओं की शुरुआत की है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, गुणवत्तापूर्ण बीज के उत्पादन और वितरण, राष्ट्रीय बागवानी मिशन, एकीकृत तिलहन, दलहन, पाम आयल और मक्का योजना आदि चल रही है। सरकार ने फसल विविधीकरण के तहत फलों एवं सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने के लिए इजरायल के साथ एक समझौता किया है। इसके पहले चरण में हरियाणा और महाराष्ट्र को शामिल किया गया है।