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बरसों पुराने इस दोस्ताने के टूटने की खबर बनी सभी अखबारों की सुर्खियां

7 वर्ष पहले
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(शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में बीजेपी को मौका परस्त और चालाक बताते हुए आलोचना की है) 
 
मुंबई. महाराष्ट्र में बीजेपी ने शिवसेना से 25 साल पुराना तो एनसीपी ने कांग्रेस के साथ 15 साल से चला आ रहा गठबंधन तोड़ दिया है। बरसों पुरानी इस दोस्ती के टूटने से महाराष्ट्र समेत पूरे देश में लोग हैरान हैं। मीडिया पिछले कई दिनों से दोनों महागठबंधनों के टूटने के कयास लगा रही थी। गठबंधन टूटने की यह खबर देश के लगभग सभी अखबारों की सुर्खियां बना। इस पैकेज में देखिए महाराष्ट्र में टूटे महागठबंधन पर हुई मीडिया कवरेज।  
 
ऐसे टूटा बीजेपी-शिवसेना गठबंधन
 
महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना के बीच 25 वर्षों का गठबंधन चुनावी स्वार्थ के आगे नतमस्तक हो गया। सीट बंटवारे को लेकर नित नए-नए फॉर्मूलों और तमाम कयासों को धता बताने के बीच शिवसेना के अड़ियल रूख के चलते भाजपा ने राज्य के चुनावी समर में अपने छोटे सहयोगी दलों के साथ मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया। कोई भी दल न तो अपनी सीटें छोड़ने को तैयार था और न ही सहयोगी दलों के लिए एक भी सीट त्याग करने के मूड में था। भाजपा महागठबंधन के बाकी तीन दलों- शिव संग्राम सेना, राष्ट्रीय समाज पार्टी और स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के साथ अगला विधानसभा चुनाव लड़ेंगी। 1985 के बाद पहली बार राज्य विधानसभा चुनावों में बहुकोणीय मुकाबला होगा। 
 
ऐसे टूटा कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन
 
बीजेपी-शिवसेना की 25 साल पुरानी दोस्ती के टूटने के कुछ ही देर बाद कांग्रेस -एनसीपी के बीच की 15 साल पुरानी दोस्ती भी खत्म हो गई। दोनों ही दलों के बीच सीटों को लेकर बनी खींचतान गठबंधन टूटने तक जा पहुंची। एनसीपी ने कांग्रेस पर उसकी अनदेखी करने और बातचीत के दौरान भी जिन सीटों पर बात चल रही थी उन सीटों पर भी कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए थे। कांग्रेस की सूची जारी होने के बाद इस अघाड़ी गठबंधन का टूटना भी तय माना जा रहा था।
 
कैसे हुई महाराष्ट्र में महागठबंधन खत्म होने की घोषणा
 
शिवसेना से रिश्ते खत्म करने की घोषणा करते हुए महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ खड़से ने कहा कि शिवसेना मुख्यमंत्री पद और सीटों की संख्या पर अड़ गई थी। इसी वजह से ऐसा हुआ। उधर शिवसेना के अनंत गीते ने कहा-भाजपा अब राकांपा के साथ जा रही है। राकांपा-कांग्रेस रिश्ते टूटने का ऐलान शरद पवार के भतीजे अजित ने किया। सियासी विशेषज्ञों का कहना है कि अब चुनाव बाद और चुनाव से पहले एक-दूसरे को पाले में लाने के लिए जमकर सौदेबाजी होगी।