(बाबा मखदूम शाह माहिमी की मजार पर चद्दर चढ़ाने पहुंचे पुलिसकर्मी)
मुंबई: शहर के माहिम इलाके में स्थित बाबा मखदूम शाह माहिमी(1372-1431) की दरगाह पर लगने वाला सालाना मेला शुरू हो गया है। देश के अलग अलग हिस्सों से आने वाले तमाम श्रद्धालु इसमें शिरकत कर रहे हैं। 10 दिन तक चलने वाले इस मेले में अकीदतमंद फातिहा पढ़ेंगे और चद्दर चढ़ाएंगे। हर साल की तरह इस बार भी माहिम पुलिस की तरफ सबसे पहले हजरत के आस्ताने पर चादर चढ़ाई और जियारत(पूजा) की।
मकदूम बाबा की दरगाह पर लगने वाले उर्स में मुंबई पुलिस सबसे पहले चादर चढ़ाने पहुंची। इस 10 दिवसीय उर्स में शामिल होने के लिए देश भर से हजारों श्रद्धालु मुंबई आते हैं। यहां हर साल एक मेला भी लगता है, कहा जाता है की मजार पर लगने वाला मेला 600 साल पुराना है। रविवार को कई पुलिस कर्मचारियों ने उर्स में भाग लिया। हर साल इस उर्स में मुस्लिम लोगों के साथ-साथ हिंदू श्रद्धालु भी बड़े पैमाने पर शामिल होते हैं।
दरगाह कमिटी ने मेले में आने वाले तमाम श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे ढोल , ताशे या शोर करने वाली दूसरी वस्तुएं मेले में न लाएं। 10 दिन तक चलने वाले इस मेले के लिए सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए गए हैं। दरगाह कमिटी , पुलिस और बीएमसी के अधिकारियों के साथ बैठकों और सलाह मशविरे से सुरक्षा संबंधी सभी पहलुओं पर खासा ध्यान दिया गया है। जगह - जगह खुफिया कैमरे लगाए गए हैं, ताकि भीड़ में भी शरारती तत्वों पर कड़ी नजर रखी जा सके।
पुलिसवालों की जियारत के पीछे अलग-अलग कहानियां
पुलिस को सबसे पहले चद्दर चढ़ाने का मौका देने के पीछे अलग-अलग मत हैं। कुछ लोगों का कहना है कि बाबा मकदूम शाह पुलिसवालों के बेहद करीबी थे और अपराधियों को पकड़वाने में अक्सर पुलिसवालों की मदद करते थे। कुछ लोगों का कहना है कि बाबा के अंतिम समय में एक सिपाही ने उन्हें पानी पिलाया था। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि 1980 में जब मुंबई में दंगे हुए थे तब उस दौरान के पुलिस कमिशनर ने यहां आकर सांप्रदायिक सद्भाव की मन्नत मांगी थी और इसके कुछ ही घंटों बाद दंगे समाप्त हो गए थे। तबसे उर्स शुरू होने के बाद सबसे पहले पुलिसवालों को यह विशेष सम्मान दिया जाता है।
माहिम में लगता है बड़ा मेला
उर्स के दौरान माहिम बीच पर बड़ा मेला लगता है। इस मेले में झूलों के अलावा लजीज व्यंजन का लुत्फ उठाया जा सकता है। श्रद्धालु बाबा की मजार पर फूल और इत्र चढ़ाते हैं। उर्स के दौरान पुलिसकर्मी और स्थानीय नागरिक मिल कर एक कव्वाली का भी आयोजन करती है।
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