(कांग्रेस नेता मानिकराव ठाकरे की फाइल तस्वीर)
पुणे: चुनाव से पहले महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने को को कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष माणिकराव ठाकरे ने 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया है। उन्होंने एक सभा के दौरान एनसीपी और बीजेपी के बीच गुप्त समझौते का आरोप लगाते हुए राष्ट्रपति शासन को दोनों पार्टियों के बीच 'गुप्त सौदे' का परिणाम बताया है।
चुनाव बाद एनसीपी और शिवसेना से किसी तरह का कोई समझौता नहीं
प्रदेशाध्यक्ष ठाकरे ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस चुनाव में अकेले चुनाव लड़ेगी और सत्ता में आने के बाद अकेले सरकार बनाएगी। आने वाले दिनों में वह एनसीपी या शिवसेना से किसी तरह का कोई समझौता नहीं करेगी। एक सभा के दौरान मानिकराव ठाकरे ने कहा, 'राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण और अभूतपूर्व है। नई सरकार के गठन में केवल कुछ दिनों का समय बचा है और ऐसे में राष्ट्रपति शासन लगाने की कोई जरूरत नहीं थी।' उन्होंने आरोप लगाया, 'यह (कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार का पतन और बाद का घटनाक्रम) एनसीपी और भाजपा के बीच गुप्त सौदे का नतीजा है।'
मुख्यमंत्री पद चाहती थी एनसीपी
राकांपा के साथ 15 साल पुराने संबंध टूटने के कारण के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'हमने गठबंधन को बनाए रखने की भरपूर कोशिश की। लेकिन 144 सीटों और बारी-बारी से ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद की मांग, संबंधों को तोड़ने का मुख्य कारण थी।' यह पूछे जाने पर कि क्या सत्ता विरोध चुनाव में पार्टी की संभावनाओं को कुंद करेगा, उन्होंने कहा कि, 'हमने कई लोकोन्मुखी योजनाएं शुरू कीं। इनका लाभ हासिल करने इन्हें जारी रखा जाना चाहिए।'
150 से ज्यादा सीट जीत कर अकेले बनाएंगे सरकार
चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस के शिवसेना के साथ जाने की किसी योजना के संबंध में किए गए सवाल पर ठाकरे ने कहा कि नहीं, 'कतई नहीं, हम एक गैर धर्मनिरपेक्ष दल के साथ केवल सत्ता में बने रहने के लिए कैसे जा सकते हैं।' कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं के बारे में उन्होंने कहा कि हम 288 सीटों पर लड़ रहे हैं और एक कामचलाऊ बहुमत हासिल कर लेंगे, संभवत: 150 से कुछ कम ज्यादा। हम राज्य में अपने बूते पर सरकार बनाएंगे।