(उद्योग मंत्री नारायण राणे मीडिया से बात करते हुए)
मुंबई। केंद्र की मोदी सरकार ने मुंबई को केंद्र शासित प्रदेश बनाने या फिर उसे किसी तरह गुजरात में मिलाने की साजिश रची है। इस प्रकार का सनसनीखेज आरोप उद्योग मंत्री नारायण राणे ने लगाया है।
राणे ने विधान परिषद सदस्य मुजफ्फर हुसैन, पार्टी के नेता बसवराज पाटिल और यशवंत हापे के साथ गांधी भवन में संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के गठन के दिन से ही कुछ लोगों की नजर मुंबई पर है। मोरारजी देसाई के कार्यकाल के दौरान मुंबई को गुजरात से जोड़ने का प्रयास हुआ था। उस समय 105 लोगों ने बलिदान देकर महाराष्ट्र को मुंबई दिलाई थी। अब मोदी सरकार ने जेएनपीटी का पूरा व्यापार गुजरात के बंदरगाह की ओर मोड़ने का प्रयत्न शुरू किया है। इतना ही नहीं रिजर्व बैंक की शाखा गुजरात में भी शुरू करने का प्रयास जारी है। यह सब करके असल में मुंबई का महत्व कम करने का प्रयास केंद्र की मोदी सरकार कर रही है। उन्होंने यह सनसनीखेज आरोप लगाने के साथ ही सवाल पूछा कि आखिर शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे केंद्र की मोदी सरकार की इस साजिश के खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं?
विजन डॉक्यूमेंट की योजनाओं के लिए कहां से आयेगी निधि?
उद्योग मंत्री राणे ने उद्धव ठाकरे के विजन डॉक्यूमेंट पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा,विधानसभा चुनाव की वजह से कोई विजन डॉक्यूमेंट पेश कर रहा है, तो कई ब्लू प्रिंट जारी कर रहा है। परंतु विजन डॉक्यूमेंट में जिन योजनाओं को दिखाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश हो रही है। उन योजनाओं के लिए आखिर निधि कहां से जायेगी?’ राणे ने कहा कि यदि राज ठाकरे की खिल्ली उड़ाते हुए कहा कि यदि वे अपना ब्लू प्रिंट जल्द जारी करें, तो हम सभी को मार्गदर्शन मिलेगा। उन्होंने कहा कि न्यूज चैनलों और समाचार पत्रों में भले ही शिवसेना-भाजपा युती टूटने की चर्चा हो, परंतु उन्हें नहीं लगता है कि युती टूटेगी क्योंकि दोनों दलों की यह सबसे महत्वपूर्ण जरूरत है। मुख्यमंत्री पद से जुड़े एक सवाल के जवाब में राणे ने कहा कि शिवसेना-भाजपा में मुख्यमंत्री पद के लायक कोई नेता नहीं है। यदि कुछ अनुभवी नेता हैं भी तो उनमें क्षमता नहीं। इसके साथ ही शिवसेना-भाजपा को मुख्यमंत्री बनाने इतने विधायकों का समर्थन मिलेगा। इसकी संभावना भी कम ही नजर आ रही है।