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अगर पिस्तौल न हुई होती जाम, तो 10 दिन पहले हो जाती गांधी जी की हत्या!

7 वर्ष पहले
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पुणे। गांधी जी का पुणे से गहरा नाता रहा है। गांधी जी ने अपने जीवन के आखिरी समय में से ज्यादातर समय पुणे में ही गुजारा। लेकिन उनके जीवन की सबसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना का संबंध भी पुणे से ही रहा। 30 जनवरी 1948 को गांधी जी की हत्या नाथूराम गोडसे नामक एक पुणेकर (पुणे के निवासी) के हाथों हुई थी। महात्मा गांधी की 66वीं पुण्यतिथि पर हम आपको उसी नाथूराम गोडसे के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी देने जा रहे हैं।

नाथूराम गोडसे का जन्म 19 मई 1910 को पुणे के निकट बारामती नामक स्थान पर चित्तपावन ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता विनायक वामनराव गोडसे पोस्ट ऑफिस में काम करते थे और माता लक्ष्मी गोडसे एक गृहिणी थीं। नाथूराम के जन्म का नाम रामचंद्र था। इनके जन्म से पहले इनके माता-पिता की सन्तानों में तीन पुत्रों की अल्पकाल में ही मृत्यु हो गयी और परिवार में केवल एक पुत्री ही जीवित बची थी। इसलिये इनके माता-पिता ने ईश्वर से प्रार्थना की थी कि यदि अब कोई पुत्र हुआ तो उसका पालन-पोषण लड़की की तरह किया जायेगा। इसी मान्यता के कारण इनकी नाक बचपन में ही छेद दी गई और नाम भी बदल दिया गया। बाद में इनकी पहचान नाथूराम विनायक गोडसे के रूप में हुई।

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