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मिलिए साधारण कार्यकर्ता से 4 बार मुख्यमंत्री बने शरद पवार से

7 वर्ष पहले
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फोटो: (मुंबई की लोकल में सफर करते एनसीपी प्रमुख शरद पवार की फाइल तस्वीर)
महाराष्ट्र चुनावों के मद्देनजर शुरू की गई विशेष सीरिज Politicians@Maharashtra की अगली कड़ी में आज हम आप को मिलवाने जा रहे हैं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी ) के संस्थापक और महाराष्ट्र के सबसे वरिष्ठ नेता शरद पवार से ।
पुणे। महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का महत्वपूर्ण स्थान है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा या एनसीपी) का गठन 25 मई 1999 को शरद पवार, पी.ए. संगमा और तारिक अनवर ने किया। इन तीनों नेताओं को कांग्रेस पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था क्योंकि इन्होंने सोनिया गांधी को पार्टी की बागडोर सौंपने पर आपत्ति जताई थी। तीनों नेताओं ने सोनिया के विदेशी मूल का मुद्दा उठाया था। कांग्रेस से अलग होने के बावजूद एनसीपी का उसके साथ गठजोड़ है और वो 10 वर्ष तक यूपीए सरकार में भी शामिल रही है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया और सिर्फ 6 सीटें ही जीत पाई। महाराष्ट्र में पार्टी के विकास में एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार का अहम योगदान रहा है। एक साधारण से कार्यकर्ता के रूप में काम शुरू करने वाले शरद पवार 4 बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने।
व्यक्तिगत जीवन
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संस्थापक और वर्तमान अध्यक्ष शरद पवार का जन्म 12 दिसंबर, 1940 को पुणे, महाराष्ट्र के बारामती ग्राम में हुआ था। शरद पवार का वास्तविक नाम शरतचंद्र गोविंदाराव पवार है। माता-पिता की ग्यारह संतानों में से एक शरद पवार एक औसत विद्यार्थी रहे। इनके पिता गोविंद राव पवार बारामती किसान सहकारी बैंक में कार्यरत थे और इनकी माता बारामती में खेतों में काम करती थीं।
पुणे से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
शरद पवार ने हाईस्कूल तक की शिक्षा बारामती के सरकारी स्कूल में पूरी की, इसके बाद वह आगे की पढ़ाई केलिए पुणे आ गए। पवार पुणे के बीएमसीसी काॅलेज में कॉमर्स की पढ़ाई के दौरान कॉलेज के जीएस भी बने। इसी दौरान वह युवक कांग्रेस से सक्रिय रूप से जुड़े और यहीं से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर।
पारिवारिक जीवन
शरद पवार का विवाह पूर्व क्रिकेटर सदू शिंदे की बेटी प्रतिभा पवार से 1 अगस्त 1967 को हुआ। शरद और प्रतिभा पवार की एकमात्र संतान सुप्रिया सूले हैं। सुप्रिया फिलहाल महाराष्ट्र के बारामती से सांसद हैं। सुप्रिया सूले ने भी अपने पिता के मार्गदर्शन में राजनीति में उतरकर अपनी अलग पहचान बनाई है। पवार के भतीजे अजित अनंतराव पवार महाराष्ट्र की राजनीति में सक्रिय हैं। शरद पवार के भाई वसंत पवार काफी समय तक शेतकारी कामगार पार्टी से जुड़े रहे। पवार को बचपन से ही राजनीति देखने और सामाजिक कार्य करने का मौका मिला।
यशवंतराव चव्हाण के मार्गदर्शन में शुरू की राजनीति
महाराष्ट्र के प्रथम मुख्यमंत्री तथा आधुनिक महाराष्ट्र के शिल्पकार यशवंतराव चव्हाण शरद पवार के राजनीतिक गुरू माने जाते हैं। यशवंतराव चव्हाण कांग्रेस के कद्दावर नेता थें। उनके ही मार्गदर्शन से ही शरद पवार पहले युवा कांग्रेस से और फिर कांग्रेस पार्टी में सक्रिय रूप से जुड़े। महाराष्ट्र में कांग्रेस के विकास के लिए किए गए काम के चलते शरद पवार की पहचान युवा कांग्रेस नेता के रुप में बनी।
राजनीति के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी सक्रिय रहे
शरद पवार ने बतौर बीसीसीआई अध्यक्ष काम करते हुए भारत में क्रिकेट के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, इसके अलावा उद्योग जगत में भी पवार का अच्छा खासा नाम है। महाराष्ट्र में शरद पवार के कई मीडिया हाउस और चीनी मिलें हैं।
राजनीतिक सफर (4 बार रहे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री)
शरद पवार 26 की उम्र में पहली बार विधायक बने। 1974 में कांग्रेस ने उन्हें महाराष्ट्र का प्रदेश सचिव नियुक्त किया और सिर्फ 38 साल की उम्र में साल 1978 में वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद भी वह साल 1988, 1990 और 1993 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद पर कार्यरत रहे। पवार को यशवंतराव चव्हाण और वसंतदादा पाटिल के बाद महाराष्ट्र का सबसे बड़ा नेता माना जाता है। यूपीए की गठबंधन सरकार में शरद पवार 10 सालों तक देश के कृषि मंत्री रहे हैं।
सहकारिता क्षेत्र में किया विकास
शरद पवार का राजनीतिक कार्यकाल अन्य नेताओं की तुलना में काफी चर्चित रहा है, मुख्यमंत्री रहने के दौरान वह सप्ताह में पांच दिन महाराष्ट्र का दौरा करते थे। मुख्यमंत्री काम में उन्होंने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। महाराष्ट्र में सहकारिता क्षेत्र को बढ़ावा देने का काम भी उनके ही कार्यकाल में हुआ। महिलाओं को आरक्षण, महिला स्वयं सहायता समूहों की स्थापना, आदि महत्वपूर्ण निर्णय उनके कार्यकाल में सरकार द्वारा लिए गए। महाराष्ट्र में पुलिस को हाफ पैन्ट की जगह फुल पैन्ट पहनने की इजाजत भी उन्हीं के कार्यकाल में मिली है।
बालासाहेब ठाकरे ने कहा था भरोसेमंद राजनेता नहीं है पवार
शिवसेना प्रमुख दिवंगत बालासाहेब ठाकरे और शरद पवार की दोस्ती भी काफी चर्चित रही है। वे एक-दूसरे के समधी भी हैं। बालासाहेब ठाकरे की बहन के बेटे सदानंद सूले शरद पवार के दामाद हैं। इसके बावजूद बालासाहेब ठाकरे अक्सर चुनावी सभाओं में शरद पवार के लिए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया करते थे। एक सभा में बाल ठाकरे ने कहा, 'शरद पवार भरोसेमंद राजनेता नहीं हैं।'
शरद पवार से जुड़े विवाद
एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार का नाम कई बार विवादों में भी रहा। अब्दुल करीम तेलगी ने शरद पवार को लगभग 600 अरब रुपए के स्टैंप घोटाले का मास्टरमाइंड बताया था। 2007 में गेहूं आयात में हुए हजारों करोड़ों की धांधली में बीजेपी ने तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार के इस्तीफे की मांग की। वर्ष 2009 में चीनी और 2011 में प्याज के दामों को लेकर भी शरद पवार को आरोपों का सामना करना पड़ा। शरद पवार पर आरोप लगा कि उन्होंने आयातकर्ताओं को लाभ पहुंचाने के लिए इन खाद्य सामग्रियों के दामों में वृद्धि की है।
आगे की स्लाइड में देखिए एनसीपी प्रमुख शरद पवार के जीवन से जुड़ी कुछ चर्चित तस्वीरें ....