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शहनाई की मधुर तान से शुरू हुआ सवाई गंधर्व भीमसेन महोत्सव

7 वर्ष पहले
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
पुणे। 62वें सवाई गंधर्व भीमसेन महोत्सव की शुरूआत सोलापुर के मशहूर शहनाई वादक भीमण्णा जाधव की शहनाई की मधुर तान से हुई। भीमण्णा के घराने में शहनाई वादन की काफी पुरानी परंपरा रही है। उनके शहनाई वादन में उनका साथ एस. देसाई कल्लूर(तबला), शंकलर शैलेश, यशवंत जाधव, औक व्यंकटेश माने ने दिया।
आक्रमक 'श्री' गायिका सानिया पाटणकर ने महोत्सव में पहली बार गायन किया। उनके द्वारा पेश किया गया 'श्री' राग लोगों द्वारा खूब सराहा गया। 'कहां में गुरु ढूंढन जांउ' इस पारंपरिक रचना के बाद पाटणकर की गुरू डाॅ. आश्विनी भिडे देशपांडे ने 'गुरबिन कौन बतावे बांट' बंदिश पेश की। वहीं डॉ. अरविंद थत्ते ने सरगम गीत पेश किया। इसके बाद मिश्र खमाज के कुछ चरण और मराठी की अभंग रचनाएं भी पेश की गई। उन्हें अविनाश पाटिल (तबला) और रोहित मराठे (हारमोनियम) ने संगत दी।
बनारस घराने के गायक प्रभाकर और दिवाकर कश्यप ने उस्ताद आमिर खां प्रणित 'अमरप्रिया' की प्रस्तुति दी। आखिरी चरण में पंडित शिवकुमार शर्मा के संतूर वादन से श्रोता मंत्रमुग्ध हुए।