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शिवकालीन किलों का वर्ल्ड हेरिटेज में हो सकता है समावेश

8 वर्ष पहले
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पुणे - पश्चिम घाटी के 39 स्थानों को यूनेस्को के प्राकृतिक धरोहर की सूचि में शामिल किया गया है। इसमें महाराष्ट्र के चार स्थानों का समावेश है। अब छत्रपति शिवाजी महाराज के किलों का समावेश वर्ल्ड हेरिटेज साइट में होने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसलिए अब राज्य सरकार और अनुसधानकर्ताओं की जिम्मेदारी यह है कि शिवाजी महाराज के समय के किलों का प्राकृतिक और सांस्कृतिक महत्व अचूक तरीके से बताया जा सके। यूएनईपी के पूर्व डाइरेक्टर और टेरी पॉलिसी सेंटर के अध्यक्ष राजेन्द्र शेंडे की जानकारी के अनुसार कंबोडिया की राजधानी नॉमपेन्ह में यूनेस्को की
मीटिंग जून 2013 में हुई ।इस समय राजस्थान के छह किलों का समावेश वर्ल्ड हेरिटेज में किया गया। इसी तर्ज पर शिवाजी महाराज के किलों का भी समावेश होने के लिए प्रयास किए जा रहे है।
शिवाजी महाराज की युद्ध नीति में महाराष्ट्र के उनके समय के किलों का विशेष महत्व रहा है। मराठों के इतिहास के साक्षी यह 360 किले हमें आज भी उस समय की याद दिलाते धरोहर के रूप में खड़े है। शिवाजी महाराज के हर किले की अलग-अलग विशेषताएं है। जिनमें से हम चुनिंदा किलों के बारे में जानेंगे।
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