(शिवसेना के मुखपत्र सामना में छपा लेख)
मुंबई. दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी(आप) की ऐतिहासिक जीत पर महाराष्ट्र और केंद्र में बीजेपी की अहम सहयोगी शिवसेना ने चुटकी लेते हुए भाजपा नेतृ्त्व पर कई सवाल उठाएं हैं। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में शिवसेना ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रचार के तरीके पर भी निशाना साधते पूछा है कि अगर यह
केजरीवाल की जीत है तो फिर हारा कौन?
दिल्ली में बीजेपी का कचरा हो गया
सामना की संपादकीय में लिखा गया है, "देश की राजनीति में खलबली मचानेवाला परिणाम दिल्ली में आया है। इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की हार हुई है। जिस दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी को शत-प्रतिशत विजय हासिल हुई उस दिल्ली की जनता ने
अरविंद केजरीवाल का झाड़ू हाथ में लेकर भाजपा का कचरा कर दिया। राजनीति कितनी चंचल हुआ करती है यह दिल्ली में सिद्ध हो गया।"
नकरात्मक प्रचार के कारण यह झटका लगा
आगे प्रधानमंत्री मोदी के प्रचार के तरीकों पर सवालियां निशान लगाते हुए सामना में लिखा गया है," अरविंद केजरीवाल के 'आप' को दिल्ली में स्पष्ट बहुमत मिला है। भाजपा दहाई का आंकड़ा तो छोड़ दें उंगलियों पर गिनने की जरूरत भी नहीं बची। इसका ठीकरा सिर्फ
किरण बेदी पर फोड़ने से काम नहीं चलने वाला। जिन केजरीवाल को 'भगोड़ा' और 'पलायनवादी' कहकर प्रचार का मुद्दा बनाया गया, आज उन्हीं केजरीवाल के समर्थन में दिल्ली की जनता क्यों खड़ी हो गई? प्रधानमंत्री मोदी का निवास दिल्ली में ही है और इतने निकट होकर भी उनका ब्रह्मास्त्र नहीं चला।" शिवसेना ने सामना में लिखा है कि, "मोदी समेत भाजपा के तमाम बड़े नेताओं ने केजरीवाल और
राहुल गांधी का अपने भाषण में मजाक उड़ाया। नकरात्मक प्रचार का झटका अंततः उन्हें लगा है।"
भाजपा नेतृ्त्व पर उठाया सवाल
चुनावी नेतृ्त्व पर सवाल उठाते हुए सामना में लिखा गया है,"चुनाव में
अमित शाह का भी जादू नहीं चला। सिर्फ घोषणा और भाषण के बल पर चुनाव नहीं जीते जा सकते। बूथ प्रमुखों का प्रबंधन, जातीय समीकरण और समग्र सत्ता को झोंक देने से भी मनचाहे परिणाम हासिल नहीं किया जा सकते। यह महाराष्ट्र में ही नहीं हुआ और दिल्ली में भी जनता ने नकार दिया।"
यह मोदी की पराजय है
हार की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री मोदी पर मढ़ते हुए शिवसेना ने 'सामना' में लिखा है, "भाजपा के लोगों को लगता है कि यह पराभव प्रधानमंत्री मोदी की नहीं है। यदि यह पराभव
नरेंद्र मोदी की नहीं है तो फिर किसकी है? केजरीवाल जीते, फिर हारा कौन? दिल्ली में समग्र प्रचार तंत्र को मोदी के नाम पर ही उतारा गया। इसलिए दिल्ली की पराभव मोदी की हार है, ऐसा अन्ना हजारे ने भी कहा। हमारा भी वही मत है।"