(सामना में छपा लेख)
मुंबई। शिवसेना ने आरपीआई नेता रामदास आठवले के बीजेपी का साथ देने के निर्णय की पार्टी के मुखपत्र सामना में कड़ी आलोचना की है। सामना के संपादकीय में लिखा गया है कि, 'आठवले ने महाराष्ट्र की आंबेडकरी जनता के साथ धोखा किया है। भीम शक्ति की भावनाओं की कद्र किए बिना ही रामदास आठवले बीजेपी के तंबू में घुस गए। लेकिन राज्य में दृश्य कुछ एेसा है जिसमें आठवले अंदर और भीम शक्ति बाहर दिखाई दे रही हैं।'
रामदास आठवले ने मंत्रीपद के लालच में जनता से धोखा किया
'आठवले अंदर, भीमशक्ति बाहर' नाम से छपी संपादकीय में आगे लिखा गया है कि, 'शिवसेना प्रमुख स्व. बालासाहेब ठाकरे चाहते थे कि शिवशक्ति और भीम शक्ति एक होकर महाराष्ट्र में राजनीतिक क्रांति का संचार करे। वे मानते थे कि महाराष्ट्र में केवल दो देवता है, एक छत्रपति शिवाजी और दूसरे डाॅ.बाबासाहेब अम्बेडकर। बालासाहेब कहते थे तुम्हारा धर्मांतरण हुआ है लेकिन रक्तातंत्रण नहीं हुआ। इसलिए एक होकर सत्ता में आएं। लेकिन रामदास आठवले ने मंत्रीपद के लालच में
अमित शाह की बातों में आकर भीम शक्ति को अंधेरे में रखते हुए जनता को धोखा दिया है। '
बीजेपी को बोझ लगते थे आठवले
सामना में आठवले पर निशाना साधते हुए लिखा गया है कि, 'आठवले कभी बीजेपी को बोझ लगते थे। लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने उन्हें मंत्री बनाने से मना कर दिया था। बीजेपी नेताओं का कहना था, सांसद बना दिया यही बहुत हैं। बीजेपी के कुछ लोग तो आठवले को देखकर ही दरवाजा बंद कर लेते थे और यही आठवले आज बीजेपी के द्वार पर हैं। उनके द्वार पर बैठकर मंत्रीपद का सौदा कर रहे हैं।'
आज भी उपमुख्यमंत्री का पद देने को तैयार है शिवसेना
आगे सामना मे लिखा है कि हम आज भी आठवले को उप मुख्यमंत्री पद देने के लिए तैयार हैं। यह महाराष्ट्र जिस तरह से शिव छत्रपति का है उसी तरह बालासाहेब और बाबासाहेब का है। इसलिए विधानसभा पर केसरिया और नीला ध्वज फहराएंगे। हम शिवशक्ति का साथ देने वाली भीम शक्ति के विराट नीले सागर का अभिनंदन करते हैं।