(शिवसेना प्रमुख की मीडिया से बात करने के दौरान की तस्वीर)
मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर बीजेपी-शिवसेना के बीच पैदा हुए विवाद पर शिवसेना ने बीजेपी को कड़ा संदेश देते हुए साफ कर दिया है कि वह किसी भी कीमत में बीजेपी को 135 सीटें देना संभव नहीं है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा है कि, \'बीजेपी से सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत जारी है। हर चुनाव से पहले ऐसे मतभेद सामने आते है। मैं नहीं चाहता कि बीजेपी-शिवसेना का गठबंधन टूटे। उद्धव ने कहा कि महाराष्ट्र में माहौल पक्ष में है और इसका फायदा उठाना चाहिए।\'
उद्धव ठाकरे ने आज मुंबई में शिवसेना के विजन डाकुमेंट की अगली कड़ी \'किसानों को लेकर पार्टी की रणनीति\' पेश करने के दौरान मीडिया के सवालों के जवाब में कहा कि,राज्य में महायुति और हिंदुत्व के लिए अच्छे दिन आए है। सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच चर्चा जारी है। मैं चाहता हूं कि 25 सालों का गठबंधन इस बार भी बरकरार रहे। मेरी पार्टी गठबंधन टूटने वाली हरकत नहीं करेगी। बीजेपी ने केंद्र में अपनी सरकार सत्ता में लाने के लिए मिशन 272+ बनाया था तो शिवसेना महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 150+ का टार्गेट रखती है तो इसमें कुछ गलत नहीं है। सीटों के बंटवारे को लेकर मामला 2-3 दिनों में सुलझ सकता है। हर चीज का विकल्प होता है।\'
उद्धव ने बीजेपी नेता माधव भंडारी द्वारा दिए गए बयान को लेकर बोलने से इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी प्रभारी ओम माथुर और प्रदेशाध्यक्ष देवेंद्र फडनवीस से सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा चल रही है। शिवसेना गठंधन टूटने वाला कोई भी कदम नहीं उठाएगी।
क्या है सीटों का असली विवाद?
2009 के चुनाव परिणाम का आधार बना कर बीजेपी ज्यादा सीटों की मांग कर रही है। 2009 के चुनावों में शिवसेना ने 160 सीटों पर चुनाव लड़कर सिर्फ 44 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि बीजेपी 119 सीटों पर लड़कर 46 सीटें जीतने में कामयाब हुई थी। हाल में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में भी भाजपा ने 23 सीटें जीतीं, जबकि शिवसेना को सिर्फ 18 सीटें मिली। इसके बाद अब बीजेपी चाहती है की उन्हें भी बराबरी की सीट मिले। मोदी लहर का हवाला देते हुए बीजेपी चाहती है कि इस बार उन्हें 150 से ज्यादा सीटें मिले।
महायुति के छोटे दलों की वजह से आ रही है दिक्कत
सीटों के बंटवारे को लेकर असली दिक्कत महायुति की अन्य पार्टियों आरपीआई अठावले, स्वाभिमानी शेतकरी संगठन, राष्ट्रीय समाज पक्ष के कारण हो रही है यह सभी दल चाहते हैं कि उन सभी को 10 से ज्यादा सीटें मिले। अब अगर 288 में 150 सीटें बीजेपी को दे दी जाएं तो बचती हैं 138 सीटें। इनमें से 10 सीट (कम से कम) आरपीआई(अठावले),10 सीट (स्वाभिमानी शेतकरी संगठन और 10 सीट राष्ट्रीय समाज पक्ष को दे दी जाएं तो बचती हैं 108 सीट।