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अपराधी की उम्र देख अदालत भी सहमा, सजा कम कर बढ़ाया जुर्माना

9 वर्ष पहले
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मुंबई. बांबे हाईकोर्ट ने 87 साल के एक बुजुर्ग की सजा कम करके उसके जुर्माने को 10 हजार से बढाकर एक लाख रुपए कर दिया है। मंगलवार को न्यायमूर्ति आरसी चव्हाण ने कहा कि इतने बुजुर्ग आदमी को जेल भेजने का कोई औचित्य नजर नहीं आ रहा है।

मामला सांगली निवासी शांताअप्पा मन्नारे का है जिसे सांगली की अदालत ने सगे भाई की हत्या के मामले में पांच साल के कारावास की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने इस सजा को घटाकर 14 महीने कर दिया और जुर्माना बढ़ाकर एक लाख कर दिया।

मन्नारे को सदोष मानव वध का दोषी ठहराया था। निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ मन्नारे ने हाईकोर्ट में अपील की थी।

इस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति चव्हाण ने चव्हाण की पांच साल की सजा को घटाकर 14 महीने कर दिया। ऐसा करने से पहले न्यायमूर्ति चव्हाण ने साफ किया कि इतने बुर्जुग आदमी को अब जेल भेजने से कुछ हासिल नहीं होगा। लिहाजा हम उसके दोष को बरकरार रखते हुए उसके जुर्माने की रकम को दस हजार से बढाकर एक लाख करते हैं।


न्यायमूर्ति चव्हाण ने मन्नारे को तीन महीने के भीतर जुर्माने की रकम कोर्ट में जमा करने का कहा है। जबकि कोर्ट प्रशासन को जुर्माने की रकम मृतक की पत्नी को मुआवजे के रूप में देने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि मन्नारे को कोर्ट ने जितनी सजा सुनाई है।

वह उतनी सजा अपील की सुनवाई के दौरान जेल में काट चुका है। इस दौरान सरकारी वकील ने आरोपी के प्रति नरमी बरतने का विरोध किया। सरकारी वकील ने कहा कि यह पीडि़त के प्रति अन्याय होगा।