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जाइए वहां, जहां आउटिंगऔर भक्ति होती है साथ-साथ

9 वर्ष पहले
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नागपुर। अगर आप एक-दो दिन के लिए आउटिंग का प्लान बना रहे हैं तो विदर्भ के चंद्रपुर जिले में स्थित भद्रावती शहर आपका मूड फ्रेश करने के लिए बेहतरीन स्थान साबित हो सकता है। नागपुर शहर से करीब 120 किलोमीटर दूर स्थितभद्रावती के कई पर्यटन स्थलों का जिक्र इतिहास के पन्नों में किया गया है। यहां आप एंज्वायमेंट के साथ भक्ति भी कर सकते हैं। यहां के जैन, बौद्ध और हिंदुओं के प्राचीन विशाल मंदिर है, जो इन समुदायों की एकता का परिचय देते हुए नजर आते हैं। उक्त धार्मिक स्थल लोगों के लिए आस्था का केंद्र बने हुए हैं। दर्शनीय प्रमुख स्थान चारों ओर फैली हरियाली ठंडक का अनुभव कराती है। घने जंगल और यहां विचरण करते वन्यप्राणी देख पर्यटक खुश हो जाते हैं। प्राचीन गुफाओं में जाकर लोग रोमांचित हो जाते हैं। यहां के प्रसिद्ध वरद्-विनायक मंदिर की अपनी एक कहानी है। पर्यटन के लिए बौद्ध विजासन गुफाएं, जैन मंदिर, अष्टविनायक मंदिर, भद्रशेष मंदिर आदि दर्शनीय प्रमुख स्थान हैं। इन जगहों पर घंटों वक्त बिताना मन को सुकून देता है। मौसम चाहे कोई भी हो, यहां आनेवालों का तांता लगा ही रहता है। कैसे पहुंचें यहां वैसे तो शहर से चंद्रपुर की ओर जाने वाली बसों को भद्रावती में स्टॉपेज दिया गया है। शहर से राज्य परिवहन महामंडल की बसों के साथ निजी बसें भी चलतीं हैं। यहां पर निजी वाहनों से आना पर्यटकों के लिए काफी आरामदायक है। प्राचीन आस्था के स्थान भद्रावती में प्राचीनतम जैन मंदिर है। यह मंदिर श्वेतांबर पंथियों का माना जाता है। इससे सट कर ही अन्य जैन मंदिर का निर्माण कार्य जारी है। राजस्थानी वास्तुकला से कारीगरी साकार होने से यह स्थान भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। इसके अलावा करीब 2000 साल पुरानी बौद्ध गुफाएं हैं, जो विजासन टेकड़ी के नाम से प्रचलित हैं। यहां देश-विदेश के बौद्ध अनुयायी धम्म का अध्ययन करने आते हैं। यहां की प्राचीन शिव टेकड़ी भद्रशेष मंदिर के नाम से अपनी पहचान बनाए हुए है। यह मंदिर नाग मंदिर के नाम से भी विदर्भ में ख्याति प्राप्त है। इसकी खास बात तो यह है कि यह मंदिर मध्य भारत का सबसे बड़ा नाग मंदिर माना जाता है। महाशिवरात्रि और नाग पंचमी के दिन यहां मेला लगता है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से हजारों भक्त आते हैं। यहां से सटे गवराला स्थान पर गणोश टेकड़ी है। इससे भी लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। यह टेकड़ी वर्षो पुरानी है। इस मंदिर का उल्लेख गणोश पुराण में भी किया गया है। मान्यता है कि उक्त स्थानों पर आनेवाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही वजह है कि हर मौसम में यहां भक्तों के साथ पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। इतिहास भद्रावती शहर का अपना एक विशिष्ट इतिहास है। कहते हैं कि इस शहर का नाम भद्र नाग से पड़ा है। यह स्थान नागवंशियों का माना जाता है। पर्यटकों के लिए इंतजाम वैसे तो बाहर मसे आनेवाले पर्यटकों के रहने के लिए राज्य पर्यटन विकास महामंडल का रेस्टहाउस बना हुआ है। यहां जैन मंदिर की धर्मशाला भी है। पर्यटक यहां आकर रहना और यहां के परिवेश में रम जाना पसंद करते हैं।

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