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डाउनलोड करेंमुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने परीक्षा के कामकाज का बहिष्कार करनेवाले कॉलेज शिक्षकों को आंतरिक परीक्षाओं के अंक (इंटर्नल माक्र्स) संबंधित विश्वविद्यालयों को भेजने का निर्देश दिया है। साथ ही सरकार को शिक्षकों की मांगों को पूरा करने के लिए एक फार्मूला तैयार करने को कहा है ताकि शिक्षक बहिष्कार वापस ले सके। इस संबंध में शुक्रवार को हाईकोर्ट फैसला सुनाएगा।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश मोहित शाह व न्यायमूर्ति एमएल शंकलेचा की खंडपीठ ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के फैसले को देखकर प्रथम दृष्टया महसूस होता है कि शिक्षकों को नेट-सेट में छूट मिलनी ही चाहिए। लिहाजा सरकार कोई एक फार्मूला अपनाए जिससे शिक्षकों से जुड़े सभी मुद्दे सुलझाए जा सकें । खंडपीठ ने इस मामले में अंतिम आदेश शुक्रवार को सुनाने की बात कही है।
बैठक रही बेनतीजा : इससे पहले सरकारी वकील एस. सलूजा ने कहा कि कई कॉलेजों में शिक्षक काम पर लौट आए हैं। कोर्ट के निर्देश के बाद सरकार ने शिक्षक संगठन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी की है। इस पर महाराष्ट्र फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स आर्गनाइजेशन(एमफुक्टो) से जुड़े सीआर सदाशिवन ने कहा कि राज्य के उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री के साथ हुई हमारी बैठक बेनतीजा रही। बैठक के दौरान हमें बिना हस्ताक्षर किया हुआ एक दस्तावेज दिया गया जो तुंरत वापस ले लिया गया।
बैठक में 19 सितंबर 1991 से तीन अप्रैल 2001 के बीच नियुक्त शिक्षकों को नेट-सेट से छूट देने के संबंध में कोई स्पष्ट निर्णय नहीं किया गया। पिछले दो महीने से शिक्षकों को वेतन नहीं दिया गया है। एरियर का भी वितरण नहीं किया गया है। इसके बावजूद शिक्षक कॉलेज आ रहे हंै और अपना काम कर रहे हंै। शिक्षकों ने सिर्फ पेपर जांचने के कामकाज का बहिष्कार किया है। वे हड़ताल पर नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि राज्य के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के साथ हमारी आधे घंटे की बैठक हो जाए तो समस्या का समाधान हो जाएगा। लेकिन अब तक मुख्यमंत्री के साथ हमारी कोई बैठक नहीं हुई है। इस पर सलूजा ने कहा कि व्यापारियों के आंदोलन के चलते मुख्यमंत्री व्यस्त हंै। इसलिए तुरंत समय दे पाना संभव नहीं है। जो शिक्षक आंदोलन में शामिल नहीं है ,उनका वेतन व एरियर दे दिया गया है।
परीक्षा परिणाम घोषित करने में होगा विलंब
इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील उदय वारुंजेकर ने कहा कि शिक्षकों की हड़ताल को 94 दिन बीत गए हैं। सरकार ने अब तक कोई हल नहीं निकाला है। इससे निश्चित तौर पर परीक्षा परिणाम घोषित करने में देरी होगी। वहीं मुंबई विश्वविद्यालय की ओर से पैरवी कर रहे वकील रुई राड्रिक्स ने कहा कि अभी तक 68 कॉलेजों ने आंतरिक परीक्षाओं के अंक विश्वविद्यालय के पास नहीं भेजे हैं। सभी पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने राज्य के सभी शिक्षकों को कॉलेज में ली गई आंतरिक परीक्षाओं के अंक विश्वविद्यालयों को भेजने का निर्देश दिया और अंतिम आदेश शुक्रवार को देने की बात कही।
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