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दिल्ली पुलिस ने मांगी हाईकोर्ट में माफी

9 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को हाईकोर्ट से माफी मांगी। पुलिस ने कोर्ट के मांगे जाने के बावजूद उन पुलिस अधिकारियों के नाम नहीं दिए थे जो 16 दिसंबर की रात गश्त ड्यूटी पर थे।

इसी रोज चलती बस में पैरामेडिकल छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म की वारदात हुई थी। अपनी इस गलती की वजह से पुलिस को अदालत से माफी मांगनी पड़ी।

चीफ जस्टिस डी. मुरुगेसन और जस्टिस वीके जैन की बेंच के सामने दिल्ली पुलिस की ओर से वकील दयान कृष्णन पेश हुए। उन्होंने कहा, 'संबंधित पीसीआर वैन में तैनात पुलिस अधिकारियों के नाम नहीं दिए जाने के लिए मैं बिना शर्त माफी मांगता हूं। हालांकि वे मामले में चश्मदीद गवाह भी हैं इसलिए उनके नाम आरोप पत्र में आए हैं।'

इसके बाद कोर्ट ने मामले में ताजा रिपोर्ट स्वीकार की। हाईकोर्ट ने बार-बार मांगे जाने के बावजूद नाम नहीं दिए जाने पर बुधवार को सख्त नाराजगी जाहिर की थी। अदालत ने इस मामले को खुद ही संज्ञान में लेते हुए जांच की निगरानी का निर्णय लिया है।

बेंच ने कहा था कि मामले में जूनियर अफसरों को निलंबित किया गया है। बड़े अफसरों को जवाबदेह नहीं बनाया गया है। बेंच ने पुलिस अफसरों से वाहनों के कांच पर काली फिल्में और परदे हटाने के निर्देश दिए।

इसके अलावा गृह मंत्रालय से दिल्ली में पीसीआर वैन की संख्या बढ़ाने को कहा है। बेंच ने 31 जनवरी को अगली सुनवाई तय की है।

साकेत कोर्ट में सुनवाई अब 14 को

गैंगरपे मामले में मेट्रोपोलिटन कोर्ट में अगली सुनवाई 14 जनवरी को होगी। अदालत आरोप पत्र के साथ दाखिल दस्तावेजों की छानबीन की पड़ताल करेगी।

कोर्ट में छह में से पांच आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है। एक अन्य के खिलाफ किशोर अदालत में केस दर्ज किया है।