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फॉरेन लैंग्वेजेस से बढ़ाएं एक्स्ट्रा स्किल

9 वर्ष पहले
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नागपुर। फॉरेन लैंग्वेज सीखना किसी भी अंडरग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट के साथ एक्स्ट्रा स्किल जरूर है, लेकिन ऐसी किसी एक लैंग्वेज के बूते पर स्टूडेंट्स टूरिस्ट गाइड, टीचिंग या इंटरनेशनल एयरलाइंस में कॅरियर बना सकते हैं। आप फ्रीलांस राइटर बन सकते हैं। रिसर्च इंस्टिट्यूट्स और इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट्स में भी अवसर हैं। होटल और टूरिज्म बिजनेस, इन्फॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी और कॉमर्स जैसे सेक्टर में भी ऑप्शन है। शहर से कई स्टूडेंट्स ग्रेजुएशन के बाद एमएस जैसे कोर्स के लिए फॉरेन जा रहे हैं। जिन स्टूडेंट्स का शहर के कॉलेजों से ही प्लेसमेंट हो रहा है, उनमें भी किसी फॉरेन लैंग्वेज का एक्स्ट्रा स्किल होने की जरूरत महसूस की जा रही है। देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के एक हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स फ्रेंच जर्मन और रशियन लैंग्वेज की पढ़ाई कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लैंग्वेज ने कुछ महीने पहले ही फ्रेंच लैंग्वेज का कोर्स शुरू किया है। कितना फायदा कंपनियां मल्टी लैंग्वेज एक्सपर्ट्स को ज्यादा रिस्पॉन्स दे रही हैं। खासकर देश की आईटी कंपनियों का ज्यादातर काम आउटसोसिर्ंग का है। डीएवीवी के इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर अवनीश व्यास बताते हैं लैंग्वेज एक्सपर्ट होने से बिजनेस में भी कई तरह से फायदा मिलता है। प्लेसमेंट के दौरान कंपनियां मल्टी लैंग्वेज एक्सपर्टाइज रखने वाले स्टूडेंट्स पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। हो सकता है कि फ्रेंच, जर्मन और रशियन जैसी लैंग्वेज आपको ज्यादा यूजफुल नहीं लगे, लेकिन अंग्रेजी के बाद सबसे ज्यादा डिमांड इन्हीं लैंग्वेज के एक्सपर्ट की है। इंग्लिश में एक्सपर्टाइज रखने वाले इन लैंग्वेज को आसानी से सीख सकते हैं। फ्रेंच के बाद जर्मन लैंग्वेज का नंबर आता है। जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और स्विट्जरलैंड में करीब 10 करोड़ लोग यह लैंग्वेज बोलते हैं। जैपनीज लैंग्वेज के एक्सपर्ट की भी डिमांड बढ़ रही है। खासकर, अगर किसी मल्टीनेशनल कंपनी में कॅरियर बनाने का आपने टारगेट रखा है तो कोई एक फॉरेन लैंग्वेज सीखना एक्स्ट्रा स्किल माना जाएगा। ये हैं कोर्सेस फॉरेन लैंग्वेज से जुड़े कोर्स तीन तरह के हैं। इसमें सर्टिफिकेट कोर्स, डिप्लोमा कोर्स और डिग्री कोर्स होते हैं। सर्टिफिकेट और डिग्री कोर्स में एडमिशन के लिए 12वीं पास होना जरूरी है। कुछ डिप्लोमा कोर्स में एडमिशन से पहले सर्टिफिकेट कोर्स करने की भी जरूरत है। अगर आपकी इंग्लिश पर पकड़ अच्छी है तो आपको बाकी फॉरेन लैंग्वेज सीखने में आसानी होगी। डिस्टेंस एजुकेशन से बचें कई यूनिवर्सिटी और प्राइवेट इंस्टिट्यूट में फॉरेन लैंग्वेज के कोर्स डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए भी कराए जा रहे हैं। हालांकि, डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए कोर्स करने से जॉब और कॅरियर में ज्यादा फायदा नहीं मिल रहा। ऐसे में रेगुलर कोर्स ज्यादा फायदेमंद हैं। वचरुअल वॉएज के स्टूडेंट्स को कम्युनिकेशन स्किल्स सिखा रहे हैं 450 सीटें ऐसे अलग-अलग कोर्स में हैं। 1 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स शहर में फॉरेन लैंग्वेज में डिप्लोमा कर रहे हैं।

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