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झुग्गीवासी-रेल प्रशासन आमने-सामने

9 वर्ष पहले
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नागपुर. अदालती लड़ाई हारने के बाद रेलवे प्रशासन ने अब झोपड़पट्टी वासियों से सीधी लड़ाई का ऐलान कर दिया है। रेलवे प्रशासन ने रामबाग, जाटतरोड़ी, इमामबाड़ा समेत इंदिरा नगर झुग्गीवासियों को नोटिस जारी कर कहा कि आपको साबित करना होगा आप अतिक्रमणकारी नहीं हैं। 20-20 लोगों को अलग-अलग तिथियों को नोटिस जारी कर सुनवाई के लिए बुलवाया गया है।

कुछ लोगों की सुनवाई हो गई है, जिसमें उन्होंने अपना पक्ष रखा है। झुग्गीवासियों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह पिछले 50 साल से यहां रह रहे हैं। तीन पीढिय़ां गुजर गई हैं। मनपा को संपत्ति कर भुगतान की रसीद पेश की है। इस दौरान कुछ दस्तावेज भी दिए।

कुछ लोगों को नयी तारीख देकर सुनवाई के लिए फिर बुलाया गया है। हालांकि रेलवे प्रशासन झुग्गीवासियों के सबूतों से संतुष्ट नहीं बताया जा रहा है। ऐसे में अब झुग्गीवासी मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण से मिलकर न्याय की गुहार लगाने की तैयारी में हैं।

बताया गया कि बुधवार को इंदिरा नगर झुग्गीवासियों का एक शिष्टमंडल रामबाग निवासी दिगंबर बागडे के नेतृत्व में मुंबई में मुख्यमंत्री मिलने जाने की तैयारी में है। फिलहाल झोपड़पट्टी वासियों में हड़कंप का माहौल है। गौरतलब है कि गत वर्ष रेलवे प्रशासन ने तीसरी लाइन के लिए झोपड़पट्टियों को हटाने का नोटिस जारी किया था। तकिया, सरस्वती नगर, फकीरा वाडी, कुंभार टोली,

इंदिरा नगर, जाटतरोड़ी, रामबाग झोपड़पट्टी वासियों को जगह खाली करने का नोटिस दिया गया था। रेलवे प्रशासन की इस कार्रवाई के विरोध में लोगों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस दौरान रेलवे प्रशासन को मुंह की खानी पड़ी थी। हाईकोर्ट ने रेलवे प्रशासन को संविधान के अनुच्छेद 20 का पालन करने और मनपा से चर्चा कर समस्या का हल निकालने को कहा था।

किन्तु इसके बाद रेलवे प्रशासन ने मनपा से चर्चा करना तो दूर, पत्र-व्यवहार करना भी जरूरी नहीं समझा। अपने स्तर पर झोपड़पट्टियों को नोटिस जारी अब खाली करने की बजाए उन्हें अतिक्रमणकारी नहीं होने के लिए सबूत पेश करने को कहा है। बताया गया कि 20-20 लोगों को अलग-अलग नोटिस जारी किया गया है। रेलवे के इस कदम से झोपड़पट्टी वासियों में हड़कंप मचा हुआ है।

रेलवे की जमीन नहीं:

मित्रलोक गृहनिर्माण सहकारी संस्था, इमामबाड़ा के दिगंबर बागडे ने बताया कि रेलवे का दावा झूठा है। रामबाग, इंदिरा नगर की जिस जगह पर रेलवे लाइन बिछी है, वह जमीन मॉडल मिल की है। यह सिंगल लाइन अजनी रेलवे स्टेशन से मॉडल मिल को जोड़ती थी। यहां से कोयले की ढुलाई होती थी।

जब मिल बिजली पर चलने लगी तो इस साइडिंग का इस्तेमाल बंद कर दिया गया था। अब मिल भी बंद हो गई है। इस जगह अब बहुमंजिला इमारत बन चुकी है। नियमानुसार 10 साल में जगह की उपयोगिता बदल जाती है या बंद रहती है तो उसे राज्य सरकार को लौटाना पड़ता है। इसलिए अब इस पर रेलवे का अधिकार नहीं रह गया। राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में यह जमीन है।