(महाराष्ट्र में महायुति संगठन को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर)
मुंबई। महायुति में सीटों के बंटवारे को लेकर पैदा हुआ गतिरोध खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। मंगलवार को बीजेपी-शिवसेना द्वारा पेश किए गए फॉर्मूले पर महायुति के छोटे सहयोगी दलों ने आपत्ति जताते हुए नकार दिया है। मंगलवार को बीजेपी नेता विनोद तावड़े ने मीडिया में आ कर गतिरोध खत्म हो जाने की बात स्वीकार की और शाम तक आधिकारिक घोषणा का ऐलान किया था। लेकिन देर रात तक चली बैठकों का कोई परिणाम निकल कर सामने नहीं आया। महायुति के छोटे दलों के पेंच फंसाने के बाद इसका ऐलान न हो सका। उम्मीद जताई जा रही है कि आज सहयोगी दलों से बात कर इस मामले में हल निकालने का प्रयास हो सकता है।
यह था बीजेपी-शिवसेना का फार्मूला
इस फार्मूले के मुताबिक शिवसेना 151, बीजेपी 130 और सहयोगी दलों के सात सीटों पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव है। सूत्र के मुताबिक बीजेपी-शिवसेना सहयोगी दलों को इस नए फार्मूले के तहत मनाने के लिए प्रयास कर रही है।
इन सहयोगी दलों ने नहीं माना समझौता
छह दलों के गठबंधन 'महायुति' में शिवसेना, बीजेपी के अलावा चार सहयोगी पार्टी आरपीआई, शिवसेना स्वाभिमानी शेतकारी संगठन, आरएसपी और शिव संग्राम हैं। इनमें से आरपीआई, शिवसेना स्वाभिमानी शेतकारी संगठन, आरएसपी और शिव संग्राम ने इस समझौते को मानने से इनकार कर दिया है।
मीटिंग बीच में छोड़कर चले गए कई नेता
सहयोगी दलों को जब नए समझौते के बारे में बताया गया वह नाराज हो गए। आरपीआई नेता रामदास अठावले, आरएसपी के माधव जनकर, एसएसपी के राजू शेट्टी और शिवसंग्राम के नेता विनायक मेटे बातचीत से बीच में ही उठकर चले गए। शिवसेना के प्रवक्ता एवं सांसद संजय राउत ने बाद में कहा कि मतभेदों को दूर करने के लिए बुधवार को भी बैठकें होंगी।
उद्धव ने दिए सीएम पद की दावेदारी छोड़ने के संकेत
कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री पद का दावा य्होकने वाले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के भी सुर बदलने लगे हैं। उन्होंने मंगलवार को कहा,'आज वार्कारी समाज के कुछ लोग मुझसे मिलने आए थे। उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया। मेरे लिए यही बहुत है। मुख्यमंत्री बनने की मेरी कोई महत्वकांक्षा नहीं है।' उद्धव का बयान इसका संकेत है कि शिवसेना इस पद के लिए अब नहीं अड़ेगी।
सेना से चुनाव बाद गठबंधन चाहते हैं भाजपा नेता
विधानसभा चुनाव में तालमेल को लेकर खत्म होते तनाव के बीच बीजेपी के राज्य भर के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शिवसेना को सबक सिखाने के मुद में हैं। पदाधिकारी चाहते हैं कि पार्टी विधानसभा चुनाव अकेले लड़े और चुनाव के बाद भाजपा और शिवसेना का गठबंधन हो। पदाधिकारी का कहना है कि विधानसभा चुनाव में अलग-अलग लड़ने से शिवसेना को उसकी असली ताकत का अंदाजा लग जाएगा।