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जायकवाड़ी को पानी मिलने का रास्ता साफ

8 वर्ष पहले
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औरंगाबाद. बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ के निर्देश पर राज्य सरकार ने समन्यायी जल वितरण के नियम बना लिए हैं। यह नियम महाराष्ट्र जलसंपदा नियमन कानून के तहत तैयार किए गए हैं। गुरुवार को इसकी जानकारी राज्य सरकार ने न्यायालय को भी दे दी। इस नियम के अतित्व में आने से जायकवाड़ी बांध को उसके हक का कम से कम २७ टीएमसी पानी हर वर्ष बिना किसी दिक्कत के मिल सकेगा। याचिका पर अगली सुनवाई 20 जून को रखी गई है।

मराठवाड़ा जनता विकास परिषद की समन्यायी जल वितरण याचिका पर गुरुवार को न्यायमूर्ति एनएच पाटील व न्यायमूर्ति एवी निरगुड़े की पीठ के सामने सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकील प्रदीप देशमुख ने पैरवी के दौरान कहा कि १७ अप्रैल-२०१३ को इसी खंडपीठ ने समन्यायी जल वितरण के नियमों को अंतिम रूप देने का आदेश महाराष्ट्र सरकार को दिया था। इस ओर न्यायालय का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा गया कि अभी तक इस दिशा में सरकार ने किसी प्रकार की जानकारी न्यायालय को नहीं दी।

राजपत्र में जल्द प्रकाशन : सरकार की ओर से एड. सुनील कुरूंदकर ने दलील देते हुए कहा कि जलसंपदा कानून के तहत नियम को अंतिम रूप दे दिया गया है। उसे जल्द से जल्द राजपत्र में प्रकाशित करने की गारंटी हाईकोर्ट को दी गई। इससे संबंधित एक पत्र भी सरकार की ओर से न्यायालय में पेश किया गया।

जलापूर्ति की यंत्रणा नहीं : याचिकाकर्ता के वकील देशमुख ने पैरवी के दौरान कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा नियम तैयार करने से समन्यायी जल वितरण की समस्या हल करने में मदद मिलेगी। वर्तमान में जायकवाड़ी में शून्य प्रतिशत जीवित जल भंडारण है।

मृत जल भंडारण से जलापूर्ति करने के लिए व्यवस्था कार्यान्वित नहीं है। इस ओर ध्यान आकर्षित करते हुए सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता सुक्रे ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किए शपथपत्र की कॉपी न्यायालय में पेश की। शपथपत्र में कहा गया है कि १४ दिसंबर-२०१२ को जायकवाड़ी में ७०१५ टीएमसी पानी उपलब्ध था। वर्तमान में जायकवाड़ी में शून्य प्रतिशत जीवित जल है। लेकिन २४.१० टीएमसी मृत जल भंडारण उपलब्ध है।

उपलब्ध पानी का उपयोग किया जा सकता है। जायकवाड़ी जलाशय पर निर्भर औरंगाबाद महानगर पालिका, जालना, अंबड़, गेवराई और ३४ जलापूर्ति योजनाओं पर निर्भर २०५ गांवों को १.८५ टीएमसी पानी की आवश्यकता है। वाष्पीकरण और अन्य बातों को ध्यान में रखते हुए ५.१९ टीएमसी पानी उपलब्ध होना आवश्यक है। यह पानी ३१ जुलाई-२०१३ तक जलापूर्ति करने के लिए पर्याप्त है। इस जरूरत को जायकवाड़ी से पूरा किया जाएगा। जायकवाड़ी का जलस्तर से ४५३.३० मीटर यानी सुरक्षा स्तर के सात मीटर नीचे जाकर पानी खींचा जाएगा। इसके लिए पर्याप्त व्यवस्था किए जाने की जानकारी दी।

जलस्तर घटने पर जलापूर्ति में होगी दिक्कत : न्यायालय द्वारा जलापूर्ति व्यवस्था के बारे में पूछने पर मनपा की ओर से एड. उमाकांत पाटील ने बताया कि मनपा द्वारा गठित १४ दस्तों द्वारा जलवाहिनी के लीकेज तलाश कर उसे बंद किया जा रहा है। जायकवाड़ी से औरंगाबाद तक की मुख्य जलवाहिनी पर ३३ बड़े लीकेज और शहर के छोटे-बड़े तीन लीकेज बंद किए गए हंै। जलापूर्ति को सुचारू रखने के लिए नए पंप लगाकर बिजली निगम से नए पावर स्टेशन की मांग कर उसके लिए पैसों का भुगतान किया गया है। सिंचाई विभाग के अनुसार जायकवाड़ी का जलस्तर जुलाई के आखिर तक ४५३ मीटर रहेगा। यदि जलस्तर इससे कम हुआ तो शहर को जलापूर्ति करने में दिक्कतें आएगी।

नहीं छोड़ा जा सकता पानी : सिंचाई विभाग के गोदावरी विकास महामंडल के वकील सुनील सोनपावले ने न्यायालय को बताया कि गंगापुर व वैजापुर के लिए नांदुर मधमेश्वर प्रकल्प में ऊपरी बांध दारणा समूह के दारणा (७६ एमएलडी), मुकणे (१९५ एमएलडी), बालदेवी (३८६ एमएलडी) ओर बावली (२३२ एमएलडी) तालाब से पानी छोड़ा गया है। वर्तमान स्थिति में ऊपरी बांधों से नादुर मधमेश्वर में पानी छोडऩा संभव नहीं है।


हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा सवाल, उजनी बांध में कितना पानी छोड़ा गया?
मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि सोलापुर के उजनी बांध में कितना पानी छोड़ा गया है? मुख्य न्यायाधीश मोहित शाह व न्यायमूर्ति एमएस शंकलेचा की खंडपीठ ने सरकार को इस संबंध में एक हलफनामा दायर करने का भी निर्देश दिया है। हलफनामे में स्पष्ट करने को कहा गया है कि अब तक बांध में कितना पानी पहुंचा है। मोहोर तालुका शेतकरी संघ की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकारी वकील अभिनंदन व्याज्ञानी ने कहा कि सरकार ने बांध के लिए 2.80 टीमसी पानी छोड़ा है। इसमें से 0.75 टीएसमी पानी पहुंच गया है।

शेष पानी भी जल्द ही बांध में पहुंचेगा। जल स्रोत नियामक प्राधिकरण ने पानी छोडऩे के संबंध में अब तक कोई फैसला नहीं लिया है। व्याज्ञानी की इन दलीलों को सुनने के बाद खंडपीठ ने सरकार को हलफ नामा दायर करने का निर्देश दिया। याचिका में साफ किया है कि मोहोर तालुका में सूखे की स्थिति है। पीने के लिए भी पर्याप्त मात्रा में भी जल उपलब्ध नहीं है। जबकि उजनी बांध के करीब अन्य बांधों में पानी है। फिर भी वहां से पानी नहीं छोड़ा जा रहा है।