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हां-ना के बाद नागपुर फाइनल

समारोह के लिए बाबासाहब की सूची में दिल्ली, बंबई, नागपुर और औरंगाबाद शहर शामिल थे।

Dainik Bhaskar

Oct 24, 2012, 03:22 AM IST
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नागपुर. संविधान के निर्माता व भारतरत्न डॉ. बाबासाहब आंबेडकर ने बौद्घ धम्म स्वीकार करने की घोषणा की थी, किन्तु नागपुर में धम्म दीक्षा समारोह होगा यह निश्चित नहीं था। समारोह के लिए बाबासाहब की सूची में दिल्ली, बंबई, नागपुर और औरंगाबाद शहर शामिल थे।
ऐसे में नागपुर ने अपनी मजबूत दावेदारी पेश की। दीक्षा समारोह के पहले 24 मई 1956 को नागपुर में पहली बार जोर-शोर से बुद्घ जयंती समारोह मनाया गया। भव्य झांकी निकाली गई, जिसमें गौतम बुद्घ को बोधि वृक्ष के नीचे बैठे हुए दिखाया गया था। रैली में महिला, पुरुष व बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए।
पांच हजार से अधिक लोगों की रैली दोपहर 3 बजे कोठारी भवन, सीताबर्डी से निकलकर शहर के प्रमुख मार्गो से होती हुई शाम 7 बजे मॉरिस कॉलेज के स्वतंत्र भवन के सामने समाप्त हुई। रैली में लोगों ने मोमबत्ती, अगरबत्ती और पंचशील ध्वज पकड़ रखा था।
स्वतंत्र भवन के सामने मैदान में बड़ा पंडाल डाला गया था, जो रोशनाई से नहाया हुआ था। समाप्ति के दौरान भव्य सभा का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्यप्रदेश सरकार के तत्कालीन श्रममंत्री दीनदयाल गुप्ता ने की थी। इस अवसर पर प्रो. रामनाथन, रेवारामजी कवाडे, प्रिंसिपल चतुर्वेदी, प्रो. दीक्षित, बा.ना वैद्य उपस्थित थे।
दूसरे दिन इस रैली को सभी प्रमुख अखबारों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। विशेष यह कि इन खबरों की कतरनों को फोटो सहित बुद्घदूत सोसायटी नागपुर के तत्कालीन कार्यवाह वामनराव गोडबोले ने डॉ. बाबासाहब आंबेडकर को दिल्ली में ले जाकर दी।
डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के आंदोलन में नागपुर शहर का योगदान विषय पर पीएचडी कर चुके डॉ. कृष्णकांत डोंगरे खुलासा करते हैं कि शायद नागपुर अपनी मजबूत दावेदारी पेश करना चाहता था, जिसी कारण दीक्षा समारोह के पहले बड़े जोश से बुद्घ जयंती मनाकर खुद को अग्रसर बताया गया। इसके
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