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विश्व में पचमढ़ी की नई पहचान ‘गोल्डन रेशम’

6 वर्ष पहले
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होशंगाबाद। अब पचमढ़ी को गोल्डन रेशम पैदा करने वाले हिल स्टेशन के रूप में नई पहचान मिलेगी। विश्व में अब तक इसके लिए असम को ही जाना जाता था। पचमढ़ी में गोल्डन रेशम के 96 हजार 411 नग ककून (कोया) तैयार कर लिए गए हैं। खास बात यह है कि इन्हीं ककून से अण्डे बनाने की तकनीक भी सफल रही है।
यहां चंपक झील से सटे 22 एकड़ रकबे में संरक्षित मैदाछाल प्रजाति के पौधे लगा दिए हैं जिनकी हाइट 5 से 7 फीट हो गई है। इन्हीं पौधों की पत्तियों को खाकर रेशम क्रमी गोल्डन रेशम के लिए ककून बनाते हैं।

केंद्रीय रेशम बोर्ड ने पचमढ़ी व सतपुड़ा पर्वत श्रेणी के जंगलों में गोल्डन रेशम पैदा करने की योजना पर काम तेज कर दिया है। बैतूल, छिंदवाड़ा, होशंगाबाद व नागपुर जिले में सर्वे करा लिया है। बोर्ड जल्द ही कमर्शियल उत्पादन करेगा।

मप्र सिल्क फेडरेशन बोर्ड के अस्सिटेंट मैनेजर यतेंद्र मोहन श्रीवास्तव ने बताया गोल्डन रेशम के लिए हिल स्टेशन अनुकूल जगह होती है। पूर्वी असम के पहाड़ी इलाके अनुकूल स्थान हैं। यहां की ऊंचाई समुद्र तल से 25 से 29 हजार फीट है। इस ऊंचाई पर मैदाछाल पौधे पैदा होते हैं। इनकी पत्तियां खाकर रेशम के कीड़े 35 से 40 दिन में ककून बनाते हैं। इससे ही गोल्डन रेशम मिलता है। यह रेशम मलबरी, टसर व ईरी की तुलना में कीमती और क्वालिटी में बेहतर है।

एक ककून औसत 3 से 4 रुपए में व इससे निकले एक किलो धागे की कीमत 8 से 10 हजार रुपए तक होती है। असम की तरह ही पचमढ़ी में 36 सौ वर्ग फीट की ऊंचाई पर मैदाछाल के पौधे मिले हैं। जिसे देखते हुए साल 2007-08 में असम से अण्डे मंगाए थे। जिससे ककून तैयार हो गया।

भारत विश्व में इकलौता देश

वैसे तो रेशम उत्पादन में चीन की हमेशा से दादागिरी रही है। काफी हद तक भारत ने उसका पीछा किया है। चीन लाख कोशिश के बाद भी गोल्डन रेशम पैदा नहीं कर सका। विश्व में गोल्डन रेशम पैदा करने वाला भारत इकलौता देश है। अब पचमढ़ी में सफल हुई गोल्डन रेशम की खेती से भारत की ताकत और बढ़ गई है।

मलबरी रेशम- शहतूत की पत्तियों से मिलता है। पहले कीड़े को पत्तियां खिलानी पड़ती है फिर 20 से 21 दिन में ये कोया बनाते हैं। ये कोया 90 से 350 रुपए प्रति किलो बिकता है।

टसर रेशम- जंगलों में साज व अर्जुन के पेड़ों पर रेशम क्रमी से कोसा तैयार होता है। एक कोसा की कीमत 1.50 से पौने 3 रुपए तक होती है।

ईरी रेशम- अरण्डी की पत्तियों से मिलता है। इसकी पत्तियां रेशम क्रमी को खिलानी पड़ती है उससे कोया बनता है जो 60 से लेकर 90 रुपए किलो बिकता है।

यह रेशम भी होता है जिले में भारत इकलौता देश असम राज्य में ही होती है पैदावार

अंडा तैयार करने के लिए माहौल अनुकूल मिला।
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