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दूध प्लांट में भोपाल से आए दो चीलिंग टैंक

5 वर्ष पहले
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सांची दूध प्लांट में अधिक मात्रा में दूध का स्टोरेज करने के लिए राजधानी से दो बड़े दूध टैंक आए हैं। इन टैंक में बड़ी मात्रा में दूध का स्टोरेज किया जा सकेगा। इस तरह दूध की कमी नहीं रहेगी, शहरवासियों को दूध से बने पदार्थ भी दिए जा सकेंगे।1982 में सांची दूध प्लांट बनकर तैयार हुआ था। जिस समय प्लांट बनाया गया था। उस समय इसकी क्षमता 10 हजार लीटर थी। समय के साथ इसकी क्षमता बढ़ती हुई वर्तमान में 32 हजार लीटर तक पहुंच चुकी है। लेकिन यह दूध जिले की खपत के हिसाब से बहुत कम है। कई बार दूध की कमी हो जाती है। इसीलिए सांची दूध प्लांट की क्षमता विस्तार का प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।

सांची दूध प्लांट में भोपाल से दो बड़े टैंक भी आ गए हैं। 30-30 हजार लीटर क्षमता वाले 20-20 फीट ऊंचे ये टैंक प्लांट के पिछले हिस्से में रखवाए गए हैं। इन दोनों टैंकों में कुल 60 हजार लीटर दूध संग्रहित करके रखा जा सकेगा। ठंडा दूध बिना खराब हुए रखे जाने से इस दूध का अन्य कार्यों में इस्तेमाल हो सकेगा। घी, श्रीखंड, मठा जैसे पदार्थ भी बनाए जा सकेंगे।

सांची दूध प्लांट के पिछले हिस्से में नया भवन बनाया जा रहा है। 1 करोड़ 83 लाख के क्षमता विस्तार प्रोजेक्ट के तहत यह भवन बनाया जा रहा है। फिलहाल दूध टैंक प्लांट के पिछले हिस्से में रखवाए गए हैं। इस नए भवन के बनने के बाद हाल ही में आए ये टैंक इसमें फिट करवाए जाएंगे।

सांची दूध प्लांट की क्षमता विस्तार का काम चल रहा है। अधिक दूध संग्रह करने के लिए हाल ही में भोपाल से दो बड़े टैंक आए हैं। इन टैंकों को प्लांट के पिछले हिस्से में रखवाया है। जल्द ही इन्हें फिट करवाया जाएगा। प्रत्येक टैंक में 30-30 हजार लीटर दूध संग्रह किया जा सकेगा। एम सतीश, एजीएम, सांची दूध प्लांट

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