सर्वर डाउन, पीओएस से नहीं मिला राशन
लोगों की सुविधा के लिए राशन दुकानों से पीओएस यानी पाइंट ऑफ सेल मशीनों के जरिए पिछले महीने से राशन वितरण शुरू किया है। मशीन में अंगूठे के फिंगर प्रिंट और स्क्रीन पर राशन का स्टेटस जांचने के बाद राशन दिया जाना है। तकनीकी गड़बड़ियों के कारण ये मशीनें लोगों और राशन दुकान संचालकों के लिए परेशानियों का सबब बन गई हैं। विभाग भी परेशानियां दूर करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। गुरुवार को भी सर्वर डाउन होने से दिनभर लोगों को राशन नहीं मिला। अधिकांश राशन दुकान संचालक इसे मशीन की खराबी मानकर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के कार्यालय पहुंच गए।
जिले की 592 राशन दुकानों में पीओएस यानी पाइंट ऑफ सेल मशीनों से 14 जनवरी को राशन वितरण शुरू किया गया था। मशीनों में तकनीकी परेशानियां आने के साथ ही सर्वर की गड़बड़ी भी एक बड़ी समस्या बन गई है। शहर की कुछ राशन दुकानों के संचालक तो मशीन की सुस्ती से तंग आकर मशीन लेकर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग पहुंच गए। यहां पर डीएसके कंपनी के इंजीनियरों ने उन्हें सर्वर के डाउन होने की बात बताई।
मशीन लेकर आए संचालक
कोठी बाजार में सहदेव मानकर की दुकान पर सुबह से ही राशन लेने वाले बड़ी संख्या में पहुंचे थे। लेकिन मशीन नहीं चलने से उन्हें राशन नहीं मिल रहा था। मशीन में उनके राशन का ब्यौरा नहीं आ रहा था। रसीद भी प्रिंट नहीं हो रही थी। काफी देर तक परेशान होने के बाद शाम को वे मशीन लेकर कलेक्टोरेट पहुंचे। उन्होंने कंपनी के टेक्नीकल सपोर्ट एक्जीक्यूटिव गौरव फाटे को गड़बड़ी बताई। फाटे ने उन्हें बताया सर्वर डाउन है इसीलिए परेशानी हो रही है।
मशीनों के संचालन में सर्वर डाउन होने से परेशानियां आ रही हैं। मार्गदर्शन के लिए कंपनी का स्टाफ लगा है। ये मशीनों को सुधारकर भी दे रहे हैं। परेशानियां दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। डीएस मुजाल्दा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति अधिकारी
2 लाख 56 हजार लोगों की बढ़ी परेशानियां
जिले में 15 लाख से अधिक लोग रहते हैं। 592 राशन दुकानें जिले में हैं। इनसे 2 लाख 56 हजार राशनकार्डधारी जुड़े हैं। इस तरह एक बड़े तबके को इस योजना से फायदा होना था। लेकिन अब तकनीकी गड़बडिय़ां फायदे की जगह परेशानियां पैदा कर रही हैं।
15 दिन प्रशिक्षण, फिर भी आ रही परेशानियां
मशीनों संचालन के लिए 15 दिन प्रशिक्षण डीएसके कंपनी ने दिया था। सतपुड़ा क्लब सदर समेत अन्य जगहों पर प्रशिक्षण दिए गए। लेकिन अब तकनीकी गड़बडिय़ां ऐसी सामने आ रही हैं एक्सपर्ट और ट्रेनर्स भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं।
बैतूल. पीओएस मशीन की जांच करते हुए कर्मचारी।