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ट्रांसपोर्टरों के फायदे के लिए 40% तक बढ़ाई ढुलाई दर

4 वर्ष पहले
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प्याज खरीदी में कमीशन का घोटाला सामने आने के बाद नई परतें खुलने लगी हैं। नागरिक आपूर्ति निगम के तत्कालीन एमडी फैज अहमद और गिरफ्तार जीएम श्रीकांत सोनी ने मनमाने तरीके से प्याज के परिवहन की दरें पहले 25 फीसदी और फिर 40 फीसदी तक बढ़ा दीं। इतना ही नहीं, मुख्यालय स्तर पर बुलाए गए ऑनलाइन टेंडरों में तो कोई खरीदार नहीं आया, लेकिन जिलों में मैनुअल टेंडर की प्रक्रिया अपनाई गई और व्यापारियों व ट्रांसपोर्टरों को जमकर लाभ पहुंचाया गया। खरीदारों ने मिलजुलकर सस्ते दामों में प्याज की खरीदी की। हैरान करने वाली बात है कि पूरे प्रदेश में बेची गई प्याज की औसत कीमत 2 रुपए 45 पैसे प्रतिकिलो ही रही। जिस शाजापुर से रेलवे रैक का सौदा करवाने के चक्कर में सोनी फंसे, वहां ट्रक, रेलवे रैक और गोदामों से एक ही कीमत यानी 3016 रुपए टन (दस क्विंटल) में प्याज बेच दी गई। शेष | पेज 12 पर

साफ है कि नागरिक आपूर्ति निगम के अफसर, व्यापारी और दलालों के गठजोड़ ने बड़े पैमाने पर प्याज को अपने स्तर से लाखों रुपए कमीशन लेकर बेच डाला। साथ ही ट्रांसपोर्टरों को अनाप-शनाप फायदा पहुंचाया गया। जिलों में व्यापारियों के साथ-साथ ट्रांसपोर्टर्स ने ग्रुप बनाकर टेंडर हथिया लिए। ‘भास्कर’ की पड़ताल में पता चला कि उमरिया जिले में भी व्यापारियों से 30 रुपए प्रति क्विंटल कमीशन मांगा गया। ट्रक चालकों ने कहा कि वजन की कटौती की गई। आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक ने 255 रुपए क्विंटल की दर से प्याज देने का कह कर 285 रुपए क्विंटल का पैसा लिया। नगद जमा कराने के बाद रसीद 255 रुपए प्रति क्विंटल की दी।





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200 करोड़ का हो सकता है खेल

प्रति किलो प्याज के परिवहन के लिए दो से ढाई रुपए का प्रावधान रखा गया। अब तक 700 करोड़ रुपए से अधिक की 87 लाख क्विंटल प्याज खरीदी गई, जिसके परिवहन में कम से कम 200 करोड़ रुपए लग सकते हैं। साफ है कि इसमें कमीशन का लाभ सीधे ट्रांसपोर्टरों को मिलेगा।

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टीम बनी, जिलों से बुलाई जानकारी

शासन ने संभागवार टीमें बना दी हैं, जिनसे प्याज खरीदी के आंकड़े बुलाए जा रहे हैं। यह सब सोनी के पकड़ने जाने के बाद किया जा रह है।

फैक्ट

- 35 रैक से 77 हजार 464 टन प्याज बेची गई।

- 15 हजार ट्रकों से 2.85 टन प्याज की बिक्री हुई।

- गोदामों से भी 10 हजार ट्रकों के जरिए 2.22 लाख टन प्याज बेची गई।

- सभी में औसत कीमत ढाई रुपए के आसपास रही।

- अभी तक 5.85 लाख टन प्याज बिकी, जबकि 8.76 लाख टन खरीदी गई।







ऐसे लिया व्यापारियों ने फायदा

पहला चरण - पहले सरकार ने 8 रुपए किलो के हिसाब से किसानों से प्याज खरीदा गया।

दूसरा चरण - यही प्याज नीलामी में 2 से 3 रुपए में व्यापारी ने थोक में खरीदा।

तीसरा चरण - फिर फुटकर व्यापारियों ने यही प्याज 5 से 7 रुपए में खरीदा।

पांचवां चरण- फुटकर व्यापारी ने सब्जी मंडी और हाथ ठेले के जरिए 10 से 12 रुपए में बेचा।

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कोट्स
‘मुझे परिवहन की दरों को तय करने के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई। न ही कमेटी के सामने रखा गया। एमडी ने अपने स्तर पर किया होगा।’

- पीसी मीणा, अपर मुख्य सचिव व कृषि उत्पादन आयुक्त

‘परिवहन की दरों का कोई भी विषय मेरे संज्ञान में नहीं आया। इस बारे में और कोई भी जानकारी नहीं दे सकता।’

- डॉ. हितेष वाजपेयी, अध्यक्ष, आपूर्ति निगम

तत्कालीन एमडी की सफाई... मार्कफेड की दरों से कम
ट्रांसपोर्टर के रेट दो बार किस आधार पर बढ़ाए गए, इसकी जानकारी तत्कालीन एमडी फैज अहमद किदवई से फोन पर ली गई। फैज इस समय अमेरिका में हैं। सूत्रों के अनुसार उन्होंने सफाई दी है कि पहले 25 और बाद में 40 फीसदी तक दरें बढ़ाईं, लेकिन यह मार्कफेड की प्रचलित दरों से कम हंै। पिछले साल खरीदी गई प्याज के परिवहन में जो दर थी, इस बार परिवहन की दर उससे कम है।

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