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एम्स में कल से 24x7 इलाज, सामान्य बीमारियों के मरीज ही होंगे भर्ती

7 वर्ष पहले
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भोपाल. राजधानी के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में 15 सितंबर से रात में भी मरीजों को भर्ती किया जा सकेगा। अब यहां 24x7 अस्पताल शुरू होने जा रहा है। हालांकि डॉक्टरों की कमी के चलते अभी गंभीर बीमारी वाले मरीजों को भर्ती नहीं किया जाएगा। साथ ही मेजर ऑपरेशन भी नहीं होंगे।

पिछले महीने शुरू हुए डे-केयर अस्पताल में रोजाना औसतन चार से पांच मरीजों को भर्ती किया जा रहा है, जिन्हें शाम को छुट्टी दे जाती है। एम्स के डायरेक्टर डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि अब अस्पताल में पर्याप्त संख्या में पैरा-मेडिकल स्टाफ और नर्स की भर्ती हो गई है। इसी वजह से रात में भी अस्पताल खुला रहेगा। बुधवार से 100 बिस्तरों वाला अस्पताल शुरू कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि एम्स का काम चार साल पिछड़ने से लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा था।
छह नए ओटी तैयार

अस्पताल में छह माइनर ऑपरेशन थिएटर बन गए हैं। बुधवार तक इनकी फिनिशिंग का काम पूरा कर लिया जाएगा। अभी यहां छोटे ऑपरेशन ही होंगे। सुविधाएं बढ़ने और डॉक्टरों की तादाद बढ़ने के बाद मेजर ऑपरेशन भी शुरू कर दिए जाएंगे।
नए हॉल में रजिस्ट्रेशन

ओपीडी के पर्चे अब मेन गेट से सटे हॉल में बनेंगे। एम्स प्रशासन ने रजिस्ट्रेशन काउंटर को यहां शिफ्ट कर दिया है। हॉल में 6 रिसेप्शनिस्ट रहेंगे। साथ ही दो स्क्रीन भी लगा दी गई हैं, जिन पर ओपीडी में मौजूद डॉक्टरों के नाम डिस्प्ले होंगे। मरीजों के बैठने की व्यवस्था भी रहेगी।
अभी ये सुविधाएं मिलेंगी
संस्थान के 100 बिस्तर के अस्पताल में फिलहाल मेडिसिन सर्जरी, डेंटिस्ट्री, स्त्री रोग, ऑर्थोपेडिक, न्यूरोलॉजी और फिजियोथैरेपी डिपार्टमेंट में मरीजों को भर्ती किया जाएगा। न्यूरोलॉजी में स्लीप क्लीनिक, मिर्गी, न्यूरोटिक डिसऑर्डर का इलाज मिलेगा। इसके अलावा हड्‌डी रोग विभाग में सामान्य फ्रेक्चर के छोटे ऑपरेशन हो सकेंगे।
45 से अधिक पैथोलॉजी टेस्ट
अस्पताल में पैथोलॉजी से संबंधित तमाम जांचे हो सकेंगी। इसके अलावा माइक्रोबायलॉजी से संबंधित बैक्टीरियोलॉजी, वायरल सीरियाेलॉजी, फंगल कल्चर व अन्य जांचे बेहद न्यूनतम शुल्क पर होंगी। इसके अतिरिक्त अल्टासोनोग्राफी की सुविधा भी मिलेगी।
चार साल पिछड़ चुका है हमारे एम्स का काम
वर्ष 2008 में एम्स भोपाल का निर्माण कार्य शुरू हुआ। इस दौरान 2010 में अस्पताल का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया। हालांकि कई बार नई डेडलाइन तय की गई, लेकिन अभी तक यह पूरा नहीं हो पाया। अब 25 दिसंबर से बड़े पैमाने पर अस्पताल शुरू करने का दावा है। इधर भुवनेश्वर, पटना, जोधपुर, रायपुर के अस्पताल सालभर पहले शुरू हो चुके हैं।

ऐसे हुई शुरुआत
15 अगस्त 2003 : भोपाल में एम्स बनाने की घोषणा की गई।
20 जनवरी 2004 : इसकी आधारशिला रखी।
2008 : संस्थान के भवन का निर्माण शुरू।
9 अगस्त 2010 : केंद्र सरकार ने भोपाल में संस्थान के तौर पर मान्यता दी।
15 अगस्त 2012 : मेडिकल कॉलेज के पहले बैच की कक्षाएं शुरू हुआ।
26 जनवरी 2013 : ओपीडी शुरू हुई।
15 अगस्त 2014 : संस्थान के डे-केयर अस्पताल की शुरुआत।

एम्स एक नजर में
154 एकड़ में फैला है परिसर
518 करोड़ रुपए अनुमानित लागत
18 विभाग चल रहे हैं फिलहाल