भोपाल. राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के फर्स्ट सेमेस्टर के छात्रों को एडमिशन के छह माह बाद स्मार्ट कार्ड मिलना शुरू होंगे। यूनिवर्सिटी के लिए स्मार्ट कार्ड बनाने वाली संस्था ने करीब 28 हजार छात्रों के डॉक्यूमेंट्स का वेरीफिकेशन कर लिया है। इनको जल्द ही स्मार्ट कार्ड वितरित किए जाएंगे। स्मार्ट कार्ड को लेकर यूनिवर्सिटी और संस्था के बीच सहमति नहीं बनने से पिछले छह महीने से यह काम टल रहा था।
सत्र 2014-15 की एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी करीब 55 हजार छात्रों को स्मार्ट कार्ड नहीं मिले थे। इससे उन्हें अपनी पहचान साबित करना मुश्किल हो गया था। छात्र काे परीक्षा फॉर्म भरने से लेकर परीक्षा में शामिल होने तक के लिए परेशानी हो रही थी। वह लाइब्रेरी का भी उपयोग नहीं कर पा रहे थे। दैनिक भास्कर ने बीती 7 फरवरी को ‘55 हजार छात्रों के नहीं बने स्मार्ट कार्ड’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
इसके बाद आरजीपीवी प्रशासन सक्रिय हुआ। वहीं, कुलपति प्रो. पीयूष त्रिवेदी के मुताबिक कुछ तकनीकी समस्या के कारण छात्रों के स्मार्ट कार्ड बनने में देरी हुई थी। अब इस समस्या को दूर कर लिया गया है। उन्होंने करीब 28 हजार छात्रों के डॉक्यूमेंट्स वेरीफिकेशन होने की बात कही है। हालांकि 27 हजार छात्रों को स्मार्ट कार्ड के लिए एक-दो महीने और इंतजार करना पड़ेगा।
यह सुविधा मिलती है स्मार्ट कार्ड से
यह स्मार्ट कार्ड एक तरह से छात्रों का आइडेंटिटी कार्ड है। इसमें छात्र और उनके पेरेंट्स के नाम, एनरोलमेंट नंबर सहित एकेडेमिक जानकारी रहती है। हर सेमेस्टर के बाद छात्र का रिजल्ट इस कार्ड में अपडेट होता है। छात्र से संबंधित जानकारी इसी कार्ड में रहती है। आरजीपीवी हर साल नए एडमिशन लेने वाले छात्रों को स्मार्ट कार्ड बनाकर देता है।
इसके अभाव में छात्र हर उस सुविधा से वंचित थे, जो आइडेंटिटी कार्ड के होने से उन्हें मिलती। स्मार्ट कार्ड की जरूरत छात्रों को परीक्षा के समय पड़ती है। परीक्षा हॉल में जाने से पहले उन्हें प्रवेश-पत्र के साथ ही स्मार्ट कार्ड भी दिखाना होता है। इससे गड़बड़ी की संभावना कम रहती है।