भोपाल. सरकारी अस्पतालों में दवा सप्लाई में एक बार फिर लापरवाही सामने आई है। मामला जेपी अस्पताल का है। यहां पिछले आठ महीनों में 3000 मरीजों को अमानक सिफालेक्सिन सीरप बांट दिया गया। इस एंटीबायोटिक सीरप का सेवन सर्दी, खांसी और बुखार का इंफेक्शन रोकने के लिए किया जाता है।
सीरप को बांटने से पहले अस्पताल प्रबंधन ने राष्ट्रीय स्तर की लैबोरेटरी में इसकी जांच कराई थी, जहां उसे मानक स्तर का बताया गया था। लेकिन अब स्टेट ड्रग लेबोरेटरी की जांच में यह अमानक पाया गया है।
राहत की बात यही है कि इस अमानक सीरप के सेवन से मरीज को कोई नुकसान नहीं होता है। जेपी अस्पताल में जनवरी में इस सीरप की 3500 बोतलें सप्लाई की गई थीं। पिछले महीने यहीं के डॉक्टरों ने इसकी क्वालिटी पर संदेह जताया।
दो सप्ताह पहले अस्पताल प्रबंधन ने इसके सैंपल जांच के लिए स्टेट ड्रग कंट्रोलर लेबोरेटरी में भेजे। लेबोरेटरी के अधिकारियों ने बताया कि सीरप में दवा कंपनी ने जिस गुणवत्ता की दवा होने का दावा किया था, वह उससे कम स्तर की पाई गई है। यह रिपोर्ट मिलने के बाद जेपी अस्पताल की अधीक्षक डॉ. वीणा सिन्हा ने सीरप के बचे हुए स्टॉक के वितरण पर रोक लगा दी है।
इमरजेंसी में खरीदा गया था सिफालेक्सिन सीरप
जेपी अस्पताल में दवा स्टोर के अधिकारियों ने बताया कि सिफालेक्सिन सीरप की खरीदी इमरजेंसी में की गई थी। अस्पताल में इस दवा का स्टॉक कम हो गया था। अस्पताल की दवा एवं उपकरण क्रय समिति ने राज्य स्तरीय दवा एवं उपकरण क्रय समिति द्वारा स्वीकृत दवा कंपनी से ही इस सीरप की खरीदी की थी।
विस्तृत रिपोर्ट मांगी
जेपी अस्पताल से एंटीबायोटिक सिफालेक्सिन सीरप का नमूना जांच में अमानक निकला है। इसकी मौखिक जानकारी मिली है। लैब के अधिकारियों से पूरी जांच रिपोर्ट मांगी है, ताकि संबंधित दवा कपंनी को ब्लैक लिस्ट किया जा सके।'
शोभित कोष्ठा, डिप्टी ड्रग कंट्रोलर खाद्य एवं औषधि प्रशासन