भोपाल. तमाम दावों और इंतजामों के बावजूद शहर में स्वाइन फ्लू का संक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है। स्वाइन फ्लू के लक्षण वाले मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। गुरुवार को इस संक्रमण के मरीजों के इलाज के लिए रजिस्टर्ड किए गए सरकारी और निजी अस्पतालों में 400 ऐसे मरीज पहुंचे, जिनमें स्वाइन फ्लू के लक्षण पाए गए। इन मरीजों को डॉक्टरों ने स्वाइन फ्लू गाइडलाइन के तहत ए केटेगरी का इलाज दिया। इस केटेगरी के सबसे ज्यादा 262 मरीज जेपी अस्पताल में पहुंचे।
स्वाइन फ्लू कंट्रोल रूम के अधिकारियों ने बताया कि शहर में बीते पांच दिनों में स्वाइन फ्लू को लेकर जागरूकता बढ़ी है। सामान्य सर्दी-खांसी और बुखार के मरीज स्वाइन फ्लू के बढ़ रहे संक्रमण के डर से सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में पहुंच रहे हैं।
दो से पांच दिन पुरानी सर्दी-खांसी वाले मरीजों को स्वाइन फ्लू ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल के तहत ए केटेगरी का इलाज दिया जा रहा है। जेपी अस्पताल की स्वाइन फ्लू ओपीडी के ड्यूटी डॉक्टर डॉ. एके थेटे ने बताया कि स्वाइन फ्लू का वायरस वातावरण में फैला हुआ है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के शरीर में सांस के जरिए पहुंचता है। ऐसे में लोगों को ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है।
स्वाइन फ्लू की बी केटेगरी के 20 मरीज
हमीदिया और जेपी अस्पताल की स्वाइन फ्लू ओपीडी में पहुंचे मरीजों में से 20 स्वाइन फ्लू की बी केटेगरी के मिले हैं। इन मरीजों को टैमी फ्लू दवा दी गई है। साथ ही तीन दिन बाद दोबारा जांच के लिए बुलाया गया है।
एड्रेस प्रूफ जमा करने पर ही मिलेगी टैमी फ्लू
जेपी और हमीदिया अस्पताल में स्वाइन फ्लू की बी केटेगरी के उन्हीं मरीजों को टैमी फ्लू टेबलेट दी जा रही है, जो एड्रेस प्रूफ जमा कर रहे हैं। इसके चलते मरीजों को दवाई लेने के लिए दो से तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। जेपी अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनिल शुक्ला ने बताया कि मरीजों का रिकॉर्ड रखने के लिए टैमी फ्लू देने से पहले एड्रेस प्रूफ जमा कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू के सी केटेगरी वाले मरीजों के परिजनों को भी टैमी फ्लू दिया जाता है। इस कारण बी और सी केटेगरी के मरीजों से दवाई के लिए एड्रेस प्रूफ जमा करा रहे हैं।