गोवंश वध करने से पहले जरा यह कानून जान लो जनाब

एक बार लग गया आरोप, तो फिर खैर नहीं, मिलेगी ऐसी सजा।

Dainik Bhaskar Network

Jan 03, 2012, 03:59 AM IST
7 years prison for govansh law
lawभोपाल। अगर किसी व्यक्ति पर गोवंश वध का आरोप लगता है तो खुद को निर्दोष साबित करने की जिम्मेदारी उसी पर होगी। ऐसा नहीं करने पर उसे सात साल की सजा और न्यूनतम पांच हजार रुपए का जुर्माना भुगतना होगा। इस संबंध में मध्यप्रदेश गोवंश वध प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। राज्य सरकार इसका करीब सवा साल से इंतजार कर रही थी। गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से मध्यप्रदेश गोवंश प्रतिषेध अधिनियम 2004 की कमियों को दूर कर उसे और अधिक सख्त बनाने के लिए वर्ष 2010 में राज्य सरकार ने विधानसभा में संशोधन विधेयक पारित किया था। इसके बाद इसे 3 सितंबर 2010 को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय भेजा था। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इसका गजट नोटिफिकेशन कर दिया गया है। कानून के क्रियान्वयन के संबंध में नियम बनाने की कार्रवाई शीघ्र शुरू की जा रही है। इसके बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा। कानून में क्या खास? - गोवंश वध के आरोपी पर होगा स्वयं को निर्दोष प्रमाणित करने का दायित्व। - गोवंश वध अपराध की सजा 7 वर्ष और जुर्माने की राशि न्यूनतम 5000 रुपए होगी। इससे अधिक जुर्माना कोर्ट के विवेक पर निर्भर रहेगा। पहले तीन - वर्ष की सजा और अधिकतम 10 हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान था। - गोवंश के अवैध परिवहन में संलग्न वाहन के मालिक को भी आपराधिक प्रकरण के दायरे में लाया जा सकेगा। - गोवंश के अवैध परिवहन के संबंध में हेड कांस्टेबल को तलाशी लेने का अधिकार होगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद इस संशोधन विधेयक को लागू करने की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा पूरी हो सकेगी। - लक्ष्मीकांत शर्मा, संस्कृति मंत्री
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