भोपाल. नगर निगम के शहर में 42 जगहों पर पेड पार्किंग स्थान है। इनमें से 33 स्थानों पर निगम के कर्मचारी खुद पार्किंग शुल्क वसूलते हैं, जबकि बाकी स्थानों पर ठेकेदार के कर्मचारी। जहां निगम के कर्मचारी हैं, वहीं से सबसे ज्यादा गड़बड़ियों की शिकायतें भी आती हैं। दरअसल, ये कर्मचारी निगम के अस्थाई कर्मचारी है।
वे पार्किंग शुल्क में हेराफेरी के लिए ही गड़बड़ी करते हैं। वे ही हैंडहेल्ड डिवाइस को खराब कर लोगों से ज्यादा पार्किंग शुल्क वसूलते हैं। खुद निगम के अफसरों ने भी यह बात मानी है, लेकिन ठेकेदारों की रुचि न होने से निगम इन स्थानों का ठेका नहीं दे पा रहा है।
दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि निगम के पेड पार्किंग स्थानों में कर्मचारियों की गड़बड़ी से पिछले साल के मुकाबले 15 प्रतिशत तक आय घट गई है। निगम को पिछले साल पार्किंग से 28 लाख रुपए की आय हुई थी, जबकि इस साल यह आय सिर्फ 23 लाख रुपए पर सिमट गई है। निगम ने अपनी आय बढ़ाने के लिए इन 33 स्थानों को भी ठेके पर देने की कोशिश की, लेकिन कोई भी ठेकेदार इसके लिए आगे नहीं आया।
गड़बड़ियां हैं, इसलिए बदल रहे व्यवस्था
^मैंने खुद प्राइवेट गाड़ियों में घूमकर पार्किंग स्थलों का जायजा लिया है। इस दौरान मैंने यह महसूस किया है कि पार्किंग कर्मचारी रसीद नहीं देते हैं। कुछ और भी गड़बड़ियां हैं। इसे दूर करने के लिए पूरी पार्किंग व्यवस्था में ही बदलाव कर रहा हूं।''
तेजस्वी एस. नायक, कमिश्नर, नगर निगम