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आठवीं तक पढ़ी राधा ने वैज्ञानिकों को डाला हैरत में, मिलेगा राष्ट्रपति पुरस्कार

9 वर्ष पहले
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बेगमगंज (रायसेन)

पांडाझिर गांव की आठवीं तक पढ़ी-लिखी राधा ने जैविक खेती के अपने प्रयोगों से इलाके के किसानों और कृषि विशेषज्ञों को हैरत में डाल दिया है। उसने खुद उर्वरक व कीटनाशक दवा बनाई, खुद छिड़काव किया, न दिन देखा न रात। अपनी कोशिश के चलते एक हेक्टेयर में २३ क्विंटल चने की उपज लेने वाली राधा को इस उपलब्धि के लिए अब श्रेष्ठ कृषक के राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा जा रहा है। वे 15 जनवरी को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों एक लाख रुपए और प्रमाण-पत्र के रूप में यह पुरस्कार ग्रहण करेंगी।

रायसेन जिले की बेगमगंज तहसील के छोटे से गांव की ३९ वर्षीय राधा दुबे २००४ से खेती कर रही हैं। पति रामनारायण दुबे के नि:शक्त होने के कारण उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली। पहले थोड़ी मुश्किलें आईं, लेकिन उन्होंने इसे चुनौती की तरह लिया। धीरे-धीरे जैविक खेती की अहमियत पता चली तो अपने प्रयोग शुरू कर दिए। दो हेक्टेयर से भी कम जमीन वाली किसान राधा ने उपज लेने के मामले में बड़े किसानों को पीछे छोड़ दिया।

कृषि विभाग के संयुक्त संचालक जेपी गुप्ता के मुताबिक आमतौर पर प्रति हेक्टेयर 8 से 12 क्विंटल चने की पैदावार होती है लेकिन राधा ने प्रति हेक्टेयर 23 क्विंटल का रिकॉर्ड उत्पादन लिया।

रोल मॉडल बनीं, अब दे रहीं ट्रेनिंग
करिश्माई उत्पादन लेने के कारण राधा इलाके के किसानों की रोल मॉडल बन चुकी हैं। उन्होंने कृषि विभाग से खुद ट्रेनिंग ली और अब तक करीब पांच सौ महिलाओं को जैविक खाद बनाने का प्रशिक्षण दे चुकी हैं।

और भी हैं खूबियां
नीम, धतूरा, आल्पोमिया, मठा से कीटनाशक दवाएं बनाती हैं। विभिन्न खाद तैयार करती हैं। केंचुए से खाद बनाकर खेती में प्रयोग करती हैं। ञ्च राधा अब तक पांच सौ भजन लिख चुकी हैं। प्रदेश सरकार की योजनाओं एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने कई गीत लिख और गा चुकी हैं।
ञ्चकेंचुओं से खाद बनाने के लिए 200 रुपए के 1 किलो केंचुए खरीदे थे और अब हर साल 20 हजार रुपए के केंचुए किसानों को बेचती हैं।