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मोहन भागवत के कड़े सुरक्षा घेरे में घुस गई महिला, बाद में कहा- मैं तो ज्ञापन देने गई थी

3 वर्ष पहले
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ओरछा(मध्यप्रदेश).  राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत बुधवार को ओरछा पहुंचे। वे जैसे ही रामराजा सरकार मंदिर पहुंचे तो एक महिला संविदा कर्मचारी सुरक्षा घेरे को तोड़कर उनसे मिलने पहुंच गई। फिर क्या था पुलिस अधिकारियों के हाथ पैर फूल गए। महिला का कहना था कि हम जैसे प्रदेश के ढाई लाख संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाए। महिला कुछ और कह पाती, इसके पहले भागवत ने कहा मैं राजनैतिक व्यक्ति नहीं हूं। संघ का एक कार्यकर्ता हूं।

 

 

सुरक्षा ऐसी की परिंदा भी पर न मार सके 

- मोहन भागवत को जेड प्लस की सुरक्षा मिली है। जैसे ही वे सातार और ओरछा पहुंचे तो सुरक्षा जवानों ने सड़क को घेर लिया। इसके अलावा पुलिस के 300 जवानों को उनकी सुरक्षा में तैनात किया गया था। सुरक्षा व्यवस्था इतनी तगड़ी थी कि परिंदा भी पर न मार सके।

- करीब 9 बजे रामराजा मंदिर में दर्शन के दौरान टीकमगढ़ की संविदा कर्मचारी निधि बुंदेला अपनी मांगों के ज्ञापन को लेकर सुरक्षा घेरा तोड़ कर अंदर पहुंच गईं थी।

- मंदिर की प्राचीन परंपरा का पालन करते हुए भागवत ने मंदिर से करीब 100 गज की दूरी पर ही अपने जेड सुरक्षा जवानों को रोक दिया था। उसके आगे उनकी सुरक्षा का जिम्मा जिला पुलिस के हवाले था। बाद में पुलिस ने महिला को रोककर उससे पूछताछ की।

-  उधर, महिला का कहना है कि मैंने संघ प्रमुख के सामने अपनी बात रखी है। पूजा-अर्चना करने के बाद मऊसहानियां के लिए रवाना हो गए।

 

10 मिनट तक पूजा-अर्चना

संघ प्रमुख ने करीब दस मिनट तक रामराजा सरकार की पूजा-अर्चना की। इस दौरान श्रद्धालुओं के आने का क्रम बना रहा। उन्हें किसी तरह की रोकटोक नहीं रही। इसके पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जब पूजा-अर्चना करने आए थे, तब श्रद्धालुओं करीब एक घंटे तक रोके रखा गया था। 

 

देर रात सातार पहुंचे

भागवत रात करीब 12.30 बजे जीटी एक्सप्रेस से झांसी पहुंचे। रेलवे स्टेशन पर झांसी और टीकमगढ़ के सिर्फ 12 पदाधिकारियों को अंदर जाने दिया गया। पदाधिकारियों ने फूल माला से भागवत का स्वागत किया। इसके बाद उनका काफिला सातार पहुंचा। यहां उन्होंने रात्रि विश्राम किया।

 

अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण तय, कुछ मामूली बाधाएं हैं, जिन्हें जल्द दूर कर लेंगे : मोहन भागवत

- जिले के मऊसहानियां में बुधवार शाम आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बुंदेलखंड केसरी महाराजा छत्रसाल की प्रतिमा का अनावरण किया। इसके बाद सभा में उन्होंने महाराजा छत्रसाल के समता-युक्त शोषण-मुक्त राज्य की सराहना करते हुए कहा कि हमें भी भाषा, जाति, उपजाति के आधार पर हुए सामाजिक विभाजन को खत्म करना है। इस भेदभाव को मिटाकर सभी समाजों को जोड़कर ही भारत राष्ट्र गुरु बनेगा और रामराज्य की कल्पना साकार होगी।

- संघ प्रमुख के इस वक्तव्य को लोकसभा के उपचुनाव में मिली हार के बाद  2019  के चुनाव की रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। संघ प्रमुख ने कहा कि भगवान राम की इच्छा से अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण तय है। इस काम के लिए समय बहुत ही अनुकूल है। मंदिर निर्माण में कुछ छोटी-छोटी बाधाएं हैं, जिन्हें भी जल्द से जल्द दूर कर लिया जाएगा।

- भागवत ने भारतीय इतिहास के लेखन में अंग्रेजों के शासन और स्वतंत्रता आंदोलन के समय से ही साजिश किए जाने का आरोप लगाया।

- उन्होंने कहा कि महाराजा छत्रसाल ही नहीं महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज के गौरवपूर्ण जीवन पर भी कुछ इतिहासकारों ने लांछन लगाए हैं।

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