भोपाल
इसमें स्नातक और स्नातकोत्तर की 700 सीट्स खाली छोड़ दी गईं। नियमानुसार इन्हें कॉलेज लेवल काउंसलिंग (सीएलसी) द्वारा भरा जाना था। ऐसा करने के बजाय विभाग ने भोपाल के एक निजी कॉलेज को सीट्स भरने के लिए विशेष अनुमति दे दी। यह इस बात से साबित होता है कि सिर्फ इसी काॅलेज में प्रवेश की तारीख को 7 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया, जबकि बाकी जगह प्रवेश प्रक्रिया 21 नवंबर को ही खत्म कर दी गई थी। खाली सीट्स भरने के लिए विभाग ने कोई विज्ञापन भी जारी नहीं किया, जबकि विज्ञापन निकालना अनिवार्य है। तारीखों में की गई गड़बड़ी क
भोपाल डीबी स्टार
प्रदेश में आयुष विभाग द्वारा वर्ष 2015 में आयोजित पाहुंट परीक्षा में धांधली की बात सामने आई है। इसमें निर्धारित नियमों को दरकिनार कर एक निजी कॉलेज को लाभ पहुंचाया गया हैै। इसकी शिकायत केन्द्र सरकार को भी की जा चुकी है। टीम ने इस बारे में विभाग के आला-अधिकारियों से बात करना चाही तो सभी ने चुप्पी साध ली। हालांकि विभागीय मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है कि इस संबंध में अगर कोई शिकायत मिलेगी, तो उसकी जांच करवा लेंगे।
क्या है मामला
आयुष महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए वर्ष 2015 में जो प्रारंभिक-आयुर्वेदिक, होम्योपैथी, यूनानी, नैच्युरोपैथी और योगा परीक्षा (पाहुंट) आयोजित की गई थी, उसकी अंतिम तिथि 30 अक्टूबर 2015 थी। गौरतलब है कि इस संबंध में हाईकोर्ट ने विभाग को आदेश दिया था। लेकिन इसके बाद राज्य शासन ने मनमाने ढंग से इसे बढ़ाकर 21 नवंबर कर दिया। कॉलेज में प्रवेश के लिए एमपी ऑनलाइन की मदद से पाहुंट की मेरिट लिस्ट तैयार की गई थी। इसके लिए पहले चरण की काउंसलिंग 21 नवंबर को होना थी। लेकिन इसी दिन मनमाने तरीके से चतुर्थ चरण तक की काउंसलिंग को पूरा कर लिया गया।
शिकायत मिलेगी तो जांच करवाएंगे
ऐसी कोई शिकायत अब तक हमें नहीं मिली है। अगर किसी ने केन्द्र सरकार को शिकायत की है तो वहां से पत्र मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। जिन बिंदु�ओं पर गड़बड़ी होने की आशंका है, उनकी हम जांच करवा लेंगे। नरोत्तम मिश्रा, मंत्री, स्वास्थ्य एवं आयुष विभाग
\\\"पाहुंट\\\' में पहुंचाया निजी कॉलेज को लाभ
समपुड़ा भवन स्थित आयुष संचालनालय।