पुरानी स्मार्ट क्लास योजना फ्लॉप दोबारा शुरू करने की कवायद
भोपाल/इंदौर डीबी स्टार
राज्य शिक्षा केंद्र (आरएसके) ने वर्ष 2010 में प्रदेश में स्मार्ट क्लास नाम से प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसका मकसद सरकारी स्कूलों के छात्रों को गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे कठिन विषयों का ज्ञान रोचक ढंग से कराना था। इसके लिए प्रदेश के हर जिले में पहली से आठवीं तक के स्कूलों में स्मार्ट क्लास खोली गई थीं। इनमें पढ़ाई कराने के लिए केन्द्र ने एलईडी टीवी, लैपटॉप, 4 बैटरियां और यूपीएस सहित चार उपकरण दिए थे। लेकिन सॉफ्टवेयर के नाम पर केंद्र ने कोई कंटेंट (पाठ्य सामग्री) नहीं भेजी। परिणामस्वरूप ये केंद्र एक बोझ बनकर रह गए। मजेदार बात यह है कि पांच साल पहले स्कूल हेड स्टार्ट केंद्र में मिली सीडी से ही बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। जिन स्कूलों के पास ये सीडी नहीं हैं, उनके उपकरण बगैर उपयोग के बंद पड़े हैं।
अब नई खोलने की तैयारी
आरएसके ने पांच साल से भले ही स्मार्ट क्लासेस की सुध न ली हो, लेकिन अब उसे सुधारने का केन्द्र के फैसला कर लिया है। वह हर जिले में 30 नई स्मार्ट क्लास खोलने की तैयारी में है। इसके लिए प्रत्येक जिले में इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और बीआरसी की टीम बनाई गई है। उन्हें स्मार्ट क्लास के लिए स्कूलों का प्रस्ताव बनाकर भेजने को कहा गया है। हालांकि कहीं से भी इस बारे में कहीं से कोई जानकारी नहीं भेजी गई है।
स्कूल उठा रहे हैं खर्च
प्रदेश में अधिकांश जगह हेड स्टार्ट केन्द्र बंद पड़े हैं। कुछ जगह कभी-कभार पढ़ाई हो जाती है, जबकि कई केन्द्रों पर ताले लग गए हैं। साफ्टवेयर की समस्या को दूर करने की पहल इंदौर में हुई है। वहां की एक निजी संस्था ने हैदराबाद की कंपनी से सॉफ्टवेयर खरीदकर कुछ स्कूलों को नि:शुल्क उपलब्ध करवाया है। इस तरह इन स्कूलों के हेड स्टार्ट केंद्र में उस सॉफ्टवेयर की मदद से पढ़ाई हो रही है।
केंद्र ने शुरुआत में योजना के तहत 12 हजार रुपए इंस्टालेशन के लिए दिए थे, लेकिन उसके बाद कोई राशि नहीं दी। ऐसे में क्लास का सारा खर्च स्कूलों को अपने खाते से करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि हेड स्टार्ट केंद्र की योजना आरएसके ने 2006 में शुरू की थी। इसके लिए स्कूलों को कम्प्यूटर भी मुहैया कराए गए थे। लेकिन सही तरीके से योजना का संचालन न होने से यह सफल नहीं हो पाई। इसके बाद हेड स्टार्ट केंद्र की जगह स्मार्ट क्लास योजना को शुरू किया गया था। लेकिन याेजना का सही संचालन न होने से वह अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाई।
अलग से कोई सॉफ्टवेयर नहीं
स्मार्ट क्लास में पढ़ाने के लिए आरएसके से सामग्री नहीं मिली है। निजी संस्था द्वारा दिए गए सॉफ्टवेयर और हेड स्टार्ट केंद्र की पुरानी सीडी से ही बच्चों को पढ़ाते हैं। संस्था से सॉफ्टवेयर नहीं मिला इसलिए पुरानी सीडी के अलावा पढ़ाने का कोई विकल्प नहीं था।  विनोद त्रिवेदी, हेडमास्टर, मिडिल स्कूल, जिंसी
नई स्मार्ट क्लास के प्रस्ताव मंगाए
 ऐसा नहीं है, स्मार्ट क्लास के लिए राज्य शिक्षा केंद्र ने कोई कंटेंट नहीं दिया। हेड स्टार्ट केंद्र की सीडी के साथ अलग से भी कुछ सामग्री दी गई थी। हम कुछ नई चीजें भी इसमें जोड़ रहे हैं। 30 नई स्मार्ट क्लास के प्रस्ताव हर जिले से मांगे हैं। वहां से जानकारी आ रही है।  अमिताभ अनुरागी, जनसंपर्क अधिकारी, आरएसके
सामान की पैकिंग तक नहीं खुली
स्मार्ट क्लास का मकसद
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शहर की निजी संस्था ने हैदराबाद की कंपनी से सॉफ्टवेयर खरीदकर दिए तो स्मार्ट क्लास में पढ़ाई हो रही है।